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Hartalika Teej Vrat 2025: भाद्रपद माह में सुहागिन महिलाएं रखेंगी ये कठिन व्रत, यहां जानें पूजा की पूरी विधि

Sun, 17 Aug 2025 01:33 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हरतालिका तीज 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। आइए जानें इस शुभ व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, दान और मंत्रों से जुड़ी जरूरी जानकारियां।
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hartalika teej - फोटो : amarujala
Hartalika Teej Puja Vidhi: हरतालिका तीज का पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से माता पार्वती और भगवान शिव के पावन मिलन की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख और सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। कई स्थानों पर कुंवारी कन्याएं भी इस व्रत को अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए करती हैं।

यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन बिना जल और अन्न के उपवास रखा जाता है। खासकर उत्तर भारत जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में इस पर्व की विशेष धूम होती है। इस वर्ष हरतालिका तीज 26 अगस्त, मंगलवार को मनाया जाएगा। आइए जानें इस शुभ व्रत की पूजा विधि, मुहूर्त, दान और मंत्रों से जुड़ी जरूरी जानकारियां।
 
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हरतालिका तीज 2025 - फोटो : amar ujala
हरतालिका तीज 2025 की तिथि और मुहूर्त
व्रत तिथि: 26 अगस्त 2025, मंगलवार
तीज तिथि शुरू: 25 अगस्त 2025, दोपहर 12:34 बजे
तीज तिथि समाप्त: 26 अगस्त 2025, दोपहर 01:55 बजे
पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: 26 अगस्त को सुबह 06:00 से 08:30 तक
व्रत पारण समय: 27 अगस्त को सूर्योदय के बाद
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हरतालिका तीज व्रत का धार्मिक महत्व - फोटो : Instagram
हरतालिका तीज व्रत का धार्मिक महत्व
हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सौभाग्यवती (सुहागिन) महिलाओं द्वारा रखा जाता है, लेकिन कुंवारी कन्याएं भी इसे अच्छे वर की प्राप्ति के लिए रखती हैं। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य है, विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख के लिए उपवास करती हैं। अविवाहित लड़कियां योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास (बिना अन्न और जल के) करती हैं और रात्रि जागरण कर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।

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हरतालिका तीज की पौराणिक कथा - फोटो : Instagram
हरतालिका तीज की पौराणिक कथा
प्राचीन काल में राजा हिमालय की पुत्री पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं। उन्होंने शिवजी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। इसी बीच, नारद मुनि ने राजा हिमालय को सलाह दी कि वे अपनी पुत्री का विवाह भगवान विष्णु से करें। राजा यह प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं। जब पार्वती को यह ज्ञात हुआ, तो उन्होंने इसका विरोध किया। उनकी एक सखी ने उन्हें जंगल में ले जाकर छिपा दिया ताकि वह यह विवाह न करें। इसी कारण इस व्रत का नाम हरतालिका पड़ा। जंगल में माता पार्वती ने घोर तपस्या की। भगवान शिव उनके तप से प्रसन्न हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसलिए, इस दिन महिलाएं शिव-पार्वती की तरह अटूट प्रेम और समर्पण की कामना से उपवास करती हैं।
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हरतालिका तीज 2025 - फोटो : amar ujala
हरतालिका तीज पूजन सामग्री
  • मिट्टी या धातु की शिव-पार्वती प्रतिमा
  • बेलपत्र, धतूरा, अक्षत (चावल)
  • फूल, फल, दीपक, धूपबत्ती
  • चंदन, जल कलश
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • नई चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम
  • नैवेद्य (मिठाई, फल, सूखे मेवे)
  • हरतालिका तीज व्रत कथा की पुस्तक
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हरतालिका तीज 2025 - फोटो : amar ujala
हरतालिका तीज पूजा विधि
  • स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • व्रत का संकल्प लें, “मैं आज हरतालिका तीज व्रत करती हूं, शिव-पार्वती की कृपा से सौभाग्य की प्राप्ति हेतु।”
  • एक चौकी पर लाल या पीले कपड़े बिछाकर मिट्टी या धातु की शिव-पार्वती प्रतिमा स्थापित करें।
  • दीपक जलाएं, कलश स्थापित करें।
  • पूजा में बेलपत्र, धतूरा, फूल, चंदन, अक्षत आदि अर्पित करें।
  • शिव-पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पण करें, चूड़ियां, बिंदी, काजल, मेहंदी, सिंदूर आदि।
  • हरतालिका तीज की कथा का पाठ करें या सुनें।
  • आरती करें।
  • रात्रि भर जागरण करें, भजन-कीर्तन करें।
 
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व्रत पारण की विधि - फोटो : freepik
व्रत पारण की विधि
  • पारण का समय ध्यान रखें।
  • सूर्योदय के बाद पारण करें।
  • पहले गौरी माता की पूजा करें और मूर्ति का विसर्जन करें।
  • पारण के समय सबसे पहले गुड़ मिला जल पीना शुभ होता है।
  • इसके बाद सात्विक भोजन करें (बिना लहसुन-प्याज वाला)।
  • व्रत के दौरान जो भी नहीं खाया जैसे पानी, फल, आदि वह पारण के बाद ही लें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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