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हरतालिका तीज पर पहले पारण या गणेश स्थापना? जानें क्या है शास्त्रीय नियम

Wed, 09 Sep 2026 12:46 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हरतालिका तीज के दिन पूजा-पाठ और व्रत से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। लेकिन अक्सर यह सवाल रहता है कि पहले पारण किया जाए या गणेश स्थापना? जानिए शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सही विधि और हरतालिका तीज पर पूजा की सही विधि।
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hartalika teej ya ganesh sthapna - फोटो : amar ujala

Hartalika Teej Aur Ganesh Sthapna: हरतालिका तीज सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है और कई घरों में गणेश जी की स्थापना भी की जाती है। हालांकि व्रत के दौरान पूजा और पारण के क्रम को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर पहले पारण करना चाहिए या गणेश स्थापना? शास्त्रों और परंपराओं में व्रत से जुड़े कर्मों का एक विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में सही विधि का पालन करना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज पर गणेश स्थापना और पारण को लेकर क्या मान्यता है और पूजा का सही क्रम क्या होना चाहिए।

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पहले हरतालिका तीज की पूजा क्यों? - फोटो : Instagram

पहले हरतालिका तीज की पूजा क्यों?
हरतालिका तीज का व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता के चलते यदि हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ें, तो सुबह सबसे पहले हरतालिका तीज की पूजा और व्रत से जुड़े अनुष्ठान पूरे करने की परंपरा मानी जाती है। इसके बाद गणेश चतुर्थी की पूजा और गणपति स्थापना की तैयारी की जा सकती है।

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सुबह इस मुहूर्त में करें तीज पूजा - फोटो : amar ujala

सुबह इस मुहूर्त में करें तीज पूजा
14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज की पूजा सुबह के समय की जाएगी। पूजा के लिए सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इस दौरान पूजा स्थल की साफ-सफाई करके भगवान शिव और माता पार्वती का विधिवत पूजन करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद तीज की कथा का पाठ और अन्य पूजा विधियां पूरी की जा सकती हैं।

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तीज पूजा के बाद करें गणेश स्थापना - फोटो : Adobe stock

तीज पूजा के बाद करें गणेश स्थापना
हरतालिका तीज की पूजा पूरी करने के बाद दोपहर में गणेश चतुर्थी की पूजा की तैयारी करें। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। 14 सितंबर 2026 को गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 11:11 बजे से 1:37 बजे तक बताया गया है। इस शुभ समय में गणपति बप्पा की प्रतिमा को पूजा स्थल पर स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश को जल, अक्षत, फूल, दूर्वा और मोदक आदि अर्पित करके विधि-विधान से पूजा करें। अंत में गणेश जी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करें।

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एक दिन दो पर्व, इसलिए बढ़ गया महत्व - फोटो : amar ujala

एक दिन दो पर्व, इसलिए बढ़ गया महत्व
14 सितंबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व मनाए जाएंगे। हालांकि दोनों की पूजा के लिए अलग-अलग समय निर्धारित है, इसलिए श्रद्धालु बिना किसी जल्दबाजी के दोनों पूजा-अनुष्ठान पूरे कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में तीज व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुबह शिव-पार्वती की पूजा और तीज से जुड़े अनुष्ठान पूरे करना उचित रहेगा। इसके बाद दोपहर के शुभ मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना करके गणपति पूजा की जा सकती है। धार्मिक परंपराओं में पूजा के साथ श्रद्धा, विश्वास और विधि का पालन भी महत्वपूर्ण माना गया है।

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दोनों पूजाओं के लिए अलग स्थान रखें - फोटो : adobe stock

दोनों पूजाओं के लिए अलग स्थान रखें
हरतालिका तीज में बनाई गई मिट्टी या बालू की शिव-पार्वती प्रतिमा और गणेश चतुर्थी के लिए स्थापित किए जाने वाले गणपति जी के लिए अलग-अलग चौकी रखना बेहतर रहेगा। सुबह तीज की पूजा पूरी होने के बाद पूजा सामग्री और प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा हो तो उसे पूरा किया जा सकता है। इसके बाद स्थान को अच्छी तरह साफ करके दोपहर में गणेश जी की स्थापना करें।

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व्रत और प्रसाद का ध्यान रखें - फोटो : Adobe stock

व्रत और प्रसाद का ध्यान रखें
जो महिलाएं निर्जला हरतालिका तीज व्रत रखती हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्य विधि के अनुसार पूजा पूरी करने के बाद व्रत का पारण करें। इसके बाद गणेश चतुर्थी की तैयारी की जा सकती है। गणेश स्थापना के समय भगवान को मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय भोग अर्पित कर परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जा सकता है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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