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Hartalika Teej 2022 Vrat: क्यों हरतालिका तीज पर बांधा जाता है फुलेरा, जानें इसका महत्व

Tue, 30 Aug 2022 09:48 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली
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हरतालिका तीज पर फुलेरा का महत्व - फोटो : अमर उजाला
Hartalika Teej 2022 Vrat: आज हरतालिका तीज है।  भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज महिलाएं पूरे हर्षोल्लास से मनाती हैं।  आज के दिन मां गौरा और भगवान शिव जी की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। हरतालिका तीज व्रत सुहागिन महिलाओं के द्वारा सुख-सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के साथ इस व्रत को रखती हैं। हरतालिका तीज के दिन महिलाएं नख से शिख तक पूरे 16 श्रृंगार करती हैं और भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करती हैं। करवा चौथ, हरियाली तीज, कजरी तीज और वट सावित्री जैसे सभी व्रतों में हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन व्रत माना जाता है। ये निर्जला व्रत होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है। हरतालिका तीज की पूजा में फुलेरा बांधने का विधान है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज की पर फुलेरा का क्या महत्व है और इसमें पांच फूलों की माला क्यों बांधी जाती है। 
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क्यों हरतालिका तीज पर बांध जाता है फुलेरा - फोटो : अमर उजाला
हरतालिका तीज 2022 मुहूर्त
तृतीया तिथि आरंभ –  29 अगस्त 2022, सोमवार, सायं 03: 21 मिनट से।
तृतीया तिथि समाप्ति – 30 अगस्त 2022 मंगलवार, सायं 03: 34 मिनट तक।
प्रदोष काल मुहूर्त –  30 अगस्त 2022, सायं 06.33- रात 08.51 तक।
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हरतालिका तीज पर फुलेरा का महत्व  - फोटो : प्रयागराज
हरतालिका तीज पर फुलेरा का महत्व 
हरतालिका तीज कठिन व्रत माना जाता है। हरतालिका तीज के पूजन में भगवान शंकर के ऊपर फुलेरा बांधा जाता है। हरतालिका तीज के पूजन में फुलेरा का विशेष महत्व है।  फुलेरा जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है फूलों से बनाया जाता है।  इसमें 5 ताजे फूलों की माला का होना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि फुलेरे में बांधी जाने वाली 5 फूलों की मालाएं भगवान भोलेनाथ की पांच पुत्रियों (जया, विषहरा, शामिलबारी, देव और दोतली) का प्रतीक है। 
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मां पार्वती ने किया था हरतालिका तीज व्रत  - फोटो : अमर उजाला
मां पार्वती ने किया था हरतालिका तीज व्रत 
मान्यताओं के अनुसार, मां पार्वती ने सबसे पहले हरतालिका तीज व्रत किया था। इस व्रत के दौरान मां पार्वती ने अंन और जल का त्याग किया था। मत पार्वती के इस कठिन तप से प्रसन्न होकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से मनचाहे वर की कामना और अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखती है। 
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