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सावन में हरियाली तीज, इसलिए महिलाएं रचाती हैं मेंहदी, पहनती हैं हरी चूड़ियां

Sat, 06 Aug 2016 04:37 PM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिट, अमर उजाला, दिल्ली।
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श‌िव पार्वती व‌िवाह
सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया त‌िथ‌ि को कहीं कज्‍जली तीज तो कहीं हर‌ियाली त‌िज के नाम से जाना जाता है यह तीज इस साल 5 अगस्‍त को है। भव‌िष्य पुराण में देवी पार्वती बताती हैं क‌ि तृतीया त‌ि‌‌थ‌ि का व्रत उन्होंने बनाया है ज‌िससे स्त्र‌ियों को सुहाग और सौभाग्य की प्राप्त‌ि होती है। सावन महीने में तृतीया त‌िथ‌ि को सौ वर्ष की तपस्या के बाद देवी पार्वती ने भगवान श‌िव को पत‌ि रूप में पाने का वरदान प्राप्त क‌िया था। आइये जानें सावन की इस तीज के बारे में कुछ और खास बातें।
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सावन में हर‌ियाली तीज, इसल‌िए मह‌िलाएं रचाती हैं मेंहदी, पहनती हैं हरी चूड़‌ियां

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श‌िव पार्वती
हर‌ियाली तीज के द‌िन भगवान श‌िव ने देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान द‌िया साथ ही देवी पार्वती के कहने पर श‌िव जी ने आशीर्वाद द‌िया क‌ि जो भी कुंवारी कन्या इस व्रत को रखेगी और श‌िव पार्वती की पूजा करेगी उनके व‌िवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी साथ ही योग्य वर की प्राप्त‌ि होगी। सुहागन स्‍त्र‌ियों को इस व्रत से सौभाग्य की प्राप्त‌ि होगी और लंबे समय तक पत‌ि के साथ वैवाह‌िक जीवन का सुख प्राप्त करेगी। इसल‌िए कुंवारी और सुहागन दोनों ही इस व्रत का रखती हैं।
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मेंहदी
हर‌ियाली तीज के द‌िन सुहागन स्‍त्र‌ियां हरे रंग का ऋृंगार करती हैं। इसके पीछे धार्म‌िक कारण के साथ ही वैज्ञान‌िक कारण भी शाम‌िल है। मेंहदी सुहाग का प्रतीक चिन्ह माना जाता है। इसलिए महिलाएं सुहाग पर्व में मेंहदी जरूर लगाती है। इसकी शीतल तासीर प्रेम और उमंग को संतुलन प्रदान करने का भी काम करती है। ऐसा माना जाता है कि सावन में काम की भावना बढ़ जाती है। मेंहदी इस भावना को नियंत्रित करता है। हरियाली तीज का नियम है कि क्रोध को मन में नहीं आने दें। मेंहदी का औषधीय गुण इसमें महिलाओं की मदद करता है।
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श‌िव पार्वती - फोटो : shiv parvati
इस व्रत में सास और बड़े नई दुल्हन को वस्‍त्र, हरी चूड़‌ियां, श्रृंगार सामग्री और म‌िठाइयां भेंट करती हैं। इनका उद्देश्य होता है दुल्हन का श्रृंगार और सुहाग हमेशा बना रहे और वंश की वृद्ध‌ि हो।
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