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Hanuman Jayanti 2021: कब है हनुमान जयंती, जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Tue, 30 Mar 2021 08:14 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हनुमान जयंती 2021 - फोटो : अमर उजाला
Hanuman Jayanti 2021: राम भक्त भगवान हनुमान को कलयुग के देवता और भगवान शिव का 11वें अवतार माना गया है। भगवान हनुमान जल्द प्रसन्न होने वाले और संकटमोचक देवता हैं। जो भक्त सच्चे मन और भाव से बजरंगबली की पूजा- आराधना करते हैं, भगवान हनुमान हमेशा उनके जीवन में आने वाली बाधाएं और संकट को दूर करते हैं। हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को रामायण, रामचरित मानस का अखंड पाठ, सुंदरकाण्ड का पाठ, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करना चाहिए।
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भगवान हनुमान जी की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
साल 2021 में कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती
हिंदू पंचांग के अनुसार हनुमान जयंती प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस बार हनुमान जयंती 27 अप्रैल को मनाई जाएगी। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के अलावा कई जगहों पर हनुमान जयंती कार्तिक माह में कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि को मानते हैं।
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hanuman ji - फोटो : instagram
हनुमानजी की पूजा-आराधना के लाभ
शास्त्रों में कहा गया है कि हनुमानजी आज भी पृथ्वी पर वास करते हैं। इन्हें चिरंजीवी का आशीर्वाद प्राप्त है। राम भक्त हनुमानजी सूर्यपुत्र और भगवान शिव के अंशावतार है। जो भी इनकी प्रतिदिन पूजा-आराधना करता है उनको जीवन में संकटों से मुक्ति और सुख शान्ति की प्राप्ति होती है। जिन लोगों की कुंडली में शनि जैसे ग्रह अशुभ प्रभाव डालते हैं, विधिपूर्वक हनुमान जी की पूजा करते हैं तो शनि देव से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। इनकी आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा, मरण आदि से पूर्णतः मुक्ति मिल जाती है।

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lete hanuman mandir, prayagraj - फोटो : प्रयागराज
हनुमान जयंती 2021 पूजा मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 26 अप्रैल 2021 की दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से
पूर्णिमा तिथि का समापन - 27 अप्रैल 2021 की रात्रि 9 बजकर 01 मिनट पर 
 
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हैप्पी हनुमान जयंती - फोटो : अमर उजाला
पूजा विधि
- ऊँ हनुमते नम:। या अष्टादश मंत्र 'ॐ भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा। का जप करने से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से तो मुक्ति मिलती है।
- पूजा में चोला चढ़ाना ,सुगन्धित तेल और सिंदूर चढ़ाने का भी विधान है।
- रामचरित मानस का अखंड पाठ, सुंदरकाण्ड का पाठ, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक आदि का पाठ करें।
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