काबा जिसे दुनिया भर के मुसलमान खुद का घर मानते हैं। हर मुसलमान यही दुआ करता है कि उसे रहती जिंदगी तक काबा के दर्शन हो जाएं। लेकिन किसी हिंदू से काबा के दर्शन के लिए कहा जाए तो वह काबा की बजाय बद्रीनाथ, केदारनाथ जाना पसंद करेगा। लेकिन संत जन धर्म में भेद नहीं करते उनके लिए काबा और केदार एक जैसे ही होते हैं और यह बात गुरू नानक देव ने काबा जाकर साबित कर दिया।
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काबा जाकर गुरू नानक देव ने किया था ऐसा काम, जानकर दंग रह जाएंगे
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गुरू नानक
सिख धर्म के संस्थापक संत नानक देव का जन्मदिन हर साल कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। इनके जन्म दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि इन्होंने समाज को आगे बढ़ने के लिए प्रकाश दिखाने का काम किया।
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गुरु नानक
काबा में इन्होंने जो भी किया वह भी कुछ इसी तरह का प्रयास था। इन्होंने अपने जीवन में धर्म को व्यवहारिक बनाने के लिए कई तरह के कदम उठाए। इन्होने धर्म को कर्म से जोड़कर जीने का तरीका बताया।
काबा जाकर गुरू नानक देव ने किया था ऐसा काम, जानकर दंग रह जाएंगे
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गुरू नानक
धर्म की व्यवहारिकता को दर्शाने के लिए इन्होंने अपने जनेऊ के अवसर पर जनेऊ धारण करने से मना कर दिया। इनका कहना था कि धर्म में सिर्फ आपकी भावना होनी चाहिए दिखावा नहीं। और काबा में भी इन्होंने यही बात इस एक घटना के माध्यम से लोगों को बताया।
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गुरु नानक
नानक देव अपनी अरब यात्रा के दौरान एक दिन सो रहे थे। तो एक व्यक्ति ने आकर नानक देव को जगाया और कहा कि इधर पैर करके न सोएं इस तरफ पवित्र काबा है।
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गुरू नानक
नानक देव उस व्यक्ति की बात सुनकर कुछ पल चुप रहे फिर सहज भाव से जवाब दिया। 'ऐसी दिशा या जगह बता दो जहां खुदा न हो' नानक देव ने उस व्यक्ति को समझाया कि ईश्वर तो हर दिशा में और हर समय हमें देख रहा है। इसलिए जो भी करो ईमानदारी से करो क्योंकि ईश्वर तो हमें हर पल देख रहा होता है उससे कुछ भी छुप नहीं है।