कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के कोप से गोकुल वासियों की रक्षा करते हुए गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा लिया था। जिसके बाद इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाने लगी। गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल होता है।
ये भी पढ़ें- Govardhan puja 2017: जानिए क्यों इस दिन किया जाता है अन्नकूट
विज्ञापन
2 of 5
इस दिन अपने घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन का चित्र बनाकर रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर फूल आदि से पूजा करें। इस दिन गायों को स्नान करवाकर उसे सजाएं और उनकी पूजा करें।
विज्ञापन
3 of 5
गाय की पूजा करना न भूलें। उनकी आरती करके प्रदक्षिणा भी करनी चाहिए।
ये भी पढ़ें- नरक चतुर्दशीः जानिए किस वजह से इस दिन को कहा जाता है छोटी दिवाली