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Diwali 2019: जानिए गोवर्धन पूजा के दिन 56 भोग की परंपरा और क्या होता है अन्नकूट?

Mon, 28 Oct 2019 08:24 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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दिवाली से ठीक एक दिन बाद गोवर्धन पूजा जिसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन और गाय की पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। वृंदावन और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है।
 
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govardhan puja
गोवर्धन पूजा का महत्व
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभिमान चूर करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इन्द्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत से गोकुल वासियों को पशुओं के लिए चारा मिलता है। गोवर्धन पर्वत बादलों को रोककर वर्षा करवाता है जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए।
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पडराौना में बहनों ने गोवर्द्घन की पूजा की। - फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
पूजा-विधि और सामग्री
गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इसके पीछे एक मान्यता यह भी है कि इन्द्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली तब गोकुल वासियों ने 56 भोग बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया था। इससे प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों को आशीर्वाद दिया कि वह गोकुल वासियों की रक्षा करेंगे। इन्द्र से भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है।

अन्नकूट बनाने के लिए कई तरह की सब्जियां, दूध और मावे से बने मिष्ठान और चावल का प्रयोग किया जाता है। अन्नकूट में ऋतु संबंधी अन्न, फल, सब्जियां का प्रसाद बनाया जाता है। गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण के साथ धरती पर अन्न उपजाने में मदद करने वाले सभी देवों जैसे, इन्द्र, अग्नि, वृक्ष और जल देवता की भी आराधना की जाती है। गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा इसलिए होती है क्योंकि अभिमान चूर होने के बाद इन्द्र ने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी और आशीर्वाद स्वरूप गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा को भी मान्यता दे दी।

 

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56 भोग की परंपरा
ऐसी मान्यता है इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए और उनकाअमर उजाला घमंड तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था। इंद्र ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए लगातार 7 दिनों तक ब्रज में मूसलाधार बारिश कराते रहे। तब भगवान कृष्ण ने लगातार सात दिनों तक भूखे-प्यासे अपनी उंगली पर गोर्वधन पर्वत को उठाएं रखना पड़ा था। इसके बाद उन्हें सात दिनों और आठ पहर के हिसाब से 56 व्यंजन खिलाए गए थे। माना जाता है तभी से ये 56 भोग की परम्परा की  शुरूआत हुई।
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govardhan puja - फोटो : facebook
शुभ मुहूर्त का समय
15:25:42 से 17:39:38 तक
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