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Ganga Dussehra 2025: गंगा दशहरा पर करें इस विधि से पूजा, करें इन मंत्रों का जाप और आरती

Thu, 05 Jun 2025 09:38 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganga Dussehra Puja Vidhi: गंगा दशहरा का पर्व इस वर्ष आज यानी 5 जून 2025, गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। ऐसे में आइए जानते हैं गंगा दशहरा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती...
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गंगा दशहरा शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
Ganga Dussehra Puja Vidhi, Mantra Aarti Lyrics in Hindi: गंगा दशहरा का पर्व इस वर्ष आज यानी 5 जून 2025, गुरुवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह पर्व विशेष रूप से हरिद्वार, प्रयागराज, ऋषिकेश और वाराणसी जैसे तीर्थस्थलों पर धूमधाम से मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर इसे गंगा जयंती के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यही वह दिन है जब मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। ऐसे में आइए जानते हैं गंगा दशहरा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती...

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गंगा दशहरा 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
गंगा दशहरा 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
दशमी तिथि प्रारम्भ - जून 04, 2025 को रात 11:54 बजे
दशमी तिथि समाप्त - जून 06, 2025 को रात 02:15 बजे

हस्त नक्षत्र प्रारम्भ - जून 05, 2025 को तड़के 03:35 बजे
हस्त नक्षत्र समाप्त - जून 06, 2025 सुबह 06:34 बजे

व्यतीपात योग प्रारम्भ - जून 05, 2025 को सुबह 09:14 बजे
व्यतीपात योग समाप्त - जून 06, 2025 को सुबह 10:13 बजे
 

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गंगा आरती - फोटो : Amar Ujala
गंगा आरती
ॐ  जय गंगे माता, श्री गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता।
ॐ जय गंगे माता…

चन्द्र-सी ज्योत तुम्हारी जल निर्मल आता।
शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता।
ॐ जय गंगे माता…

पुत्र सगर के तारे सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता।
ॐ जय गंगे माता…

एक ही बार भी जो नर तेरी शरणगति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परम गति पाता।
ॐ जय गंगे माता…

आरती मात तुम्हारी जो जन नित्य गाता।
दास वही जो सहज में मुक्ति को पाता।
ॐ जय गंगे माता…

कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।

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पूजा विधि - फोटो : adobe stock
पूजा विधि
गंगा दशहरा पर विशेष रूप से मां गंगा और भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दिन गंगा तट पर जाकर श्रद्धापूर्वक स्नान करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। मान्यता है कि कम से कम तीन बार डुबकी लगाकर गंगा स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें, फिर मां गंगा की पूजा करें और दीप व धूप से आरती उतारें। इसके पश्चात शिवलिंग पर जल चढ़ाकर भगवान शिव और माता गंगा के मंत्रों का जाप करें। यदि संभव हो तो इस दिन खीर, फल, मिश्री, गुड़ और चावल का दान अवश्य करना चाहिए। 
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मंत्र जाप - फोटो : adobe stock
गंगा स्नान के दौरान करें इस मंत्र का जाप
गंगा गंगेति यो ब्रूयात्, योजनानाम् शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो, विष्णुलोके स गच्छति।

मोक्ष प्राप्ति के लिए करें इस मंत्र का जाप
गंगां वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतं। त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु मां ।।

मानसिक शांति के लिए करें इस मंत्र का जाप
ऊं गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति नर्मदे सिंधु कावेरी जलस्मिन्सन्निधिं कुरु।
ऊं नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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