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Ganga Dussehra 2022: गंगा दशहरा पर बन रहा है विशेष योग, जानें इसका महत्व और महिमा

Thu, 09 Jun 2022 10:10 AM IST
श्वेता सिंह पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
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गंगा दशहरा की महिमा - फोटो : Google
Ganga Dussehra 2022: सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी के कमंडल से राजा भागीरथ की तपस्या के द्वारा देवी गंगा को धरती पर अवतार दिवस को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी पर अवतार से पहले गंगा नदी स्वर्ग का हिस्सा थीं। गंगा दशहरा के दिन भक्त देवी गंगा की पूजा करते हैं और गंगा में डुबकी लगाते हैं, और दान-पुण्य, उपवास, भजन और गंगा आरती का आयोजन करते हैं। मान्यता है इस दिन मां गंगा की पूजा करने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होगी। हिन्दू धर्म में तो गंगा को देवी मां का दर्जा दिया गया है। यह माना जाता है कि जब मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई तो वह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी, तभी से इस तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 09 जून को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाएगा |
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गंगा दशहरा की महिमा
मां गंगा की साधना
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान समय में भौतिक जीवन जी रहे मनुष्य से जाने अनजाने जो पापकर्म हो जाते हैं उनकी मुक्ति के लिए मां गंगा की साधना करनी चाहिए कहने का तात्पर्य है जिस किसी ने भी पापकर्म किए हैं और जिसे अपने किए का पश्चाताप है और इससे मुक्ति पाना चाहता है तो उसे सच्चे मन से मां गंगा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। 
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गंगा दशहरा की महिमा
गंगा दशहरा पर शुभ योग 
मां गंगा मनुष्य मात्र के कल्याण के लिए धरती पर आई धरती पर इनका अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी को हुआ अतः  यह तिथि उनके नाम पर गंगा दशहरा के नाम से प्रसिद्ध हुई  इस बार इस तिथि को गुरूवार और हस्त नक्षत्र है इसलिए यह तिथि सब पापों का हरण करने वाली होगी, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी संवत्सर का मुख कही जाती है।  इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है इस तिथी को गंगा स्नान एवं श्री गंगा जी के पूजन से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है जिनमे से 3 कायिक 4 वाचिक  तथा 3 मानसिक होते हैं। इस वर्ष गंगा दशहरा 9 जून 2022 को मनाया जाएगा।  इस दिन रवि योग भी बन रहा है इस दिन ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि हस्त नक्षत्र व्यतिपात योग गर करण तथा कन्या का चंद्रमा विराजमान है। 

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गंगा दशहरा की महिमा - फोटो : mirzapur
10 संख्या का महत्व 
 इस दिन गंगा जी में अथवा समीप किसी पवित्र नदी या सरोवर के जल में स्नान कर गंगा जी का ध्यान करें पूजा में यथाशक्ति 10 प्रकार के पुष्प 10 दीपक 10 प्रकार के नैवेध 10 तांबूल एवं 10 फल होने चाहिए। दक्षिणा भी 10 ब्राह्मणों को देनी चाहिए । 10 प्रकार के पापों की निवृत्ति के लिए सभी वस्तुएं 10 की संख्या में निवेदित की जाती है।  
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गंगा दशहरा की महिमा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
दान की महत्ता 
इस दिन सत्तू का दान और मां गंगा का पूजन का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा पर राष्ट्र कल्याण के लिए विशेष यज्ञ करना चाहिए, मंत्रों का जाप करना चाहिए और साधना उपासना करनी चाहिए।  इस दिन पूजा-पाठ जप तप साधना उपासना गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मां गंगा की विशेष महिमा है। पूजा पाठ में गंगा जल के बिना कुछ भी नहीं होता इसलिए मां गंगा का हमेशा आशीर्वाद लेना चाहिए। 
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गंगा दशहरा की महिमा - फोटो : अमर उजाला
गंगा दशहरा में लें संकल्प 
दुनिया की सबसे पवित्र नदियों में एक है गंगा। गंगा के निर्मल जल पर लगातार हुए शोधों से भी गंगा विज्ञान की हर कसौटी पर भी खरी उतरी विज्ञान भी मानता है कि गंगाजल में कीटाणुओं को मारने की क्षमता होती है जिस कारण इसका जल हमेशा पवित्र रहता है। और हमारी सनातन संस्कृति में गंगा को मां का स्थान दिया गया है । सदियों से समस्त मानव समाज इस मां रूपी पवित्र जल का उपयोग करता है और हमें इसके लिए अपनी गंगा मां का कृतार्थ होना चाहिए किन्तु पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में विकास के नाम पर जिन प्राकृतिक संसाधनों का अन्धाधुन्ध दोहन किया गया है, उनमें गंगा नदी-जल के साथ कई प्रदूषित तत्व मिलाए गए और मिलाए  जा रहें हैं। हमें समझने की आवश्यकता है कि गंगा केवल जलधारा ही नहीं अपितु जनजीवन और लोक-संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। गंगा सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के साथ-साथ विकास की भी जननी रही हैं। और वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर समस्या है। 
देश के कई राज्यों में ग्रीष्मकालीन समय आते ही यह भयावह होने लगता है क्योंकि हमने अपनी बूंद-बूंद सहेजने वाली पूर्वजों की जल-संस्कृति को तिलांजलि दे दी है वर्तमान समय में जल की दोहरी समस्या है एक तो पर्याप्त मात्रा में पेयजल बचा नहीं है और जो बचा हुआ है उसका रूप-रंग और स्वाद तेजी से बदल रहा है और इन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार एकमात्र इंसान है और हमें इस बात को गम्भीरता से समझना होगा। ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा जल तत्व का कारक है यदि हम अपने दैनिक जीवन में जल को दूषित करेंगे, जल का संरक्षण नहीं करेंगे तो हमारा मन अशान्त और चित्त दूषित होगा और हमारा जीवन अशान्त होगा। इसलिए गंगा को प्रदूषण से बचाकर हम अपने कुंडली में चन्द्र ग्रह को मजबूत कर सकते हैं और अपने चित्त को प्रसन्न और स्वस्थ रह सकते हैं।
गंगा दशहरा में हम सभी को यह संकल्प लेना होगा गंगा की सफाई, स्वच्छता  में हम सभी पूर्ण सहयोग करेंगे क्योंकि गंगा की सफाई हेतु हम सबका एकीकृत होना वर्तमान की एक बड़ी ज़रूरत है। और सही मायने में यही माँ गंगा की सच्ची सेवा और उपासना होगी।
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