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Ganga Dussehra 2022: गजकेसरी और महालक्ष्मी योग में गंगा दशहरा का त्योहार, स्नान और दान से मिलेगा महापुण्य

Mon, 06 Jun 2022 05:04 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Ganga Dussehra 2020: गंगा दशहरा के दिन गुरु-चंद्रमा और मंगल का द्दष्टि संबंध बन रहा है इस कारण से गजकेसरी और महालक्ष्मी योग का संयोग है। - फोटो : अमर उजाला
Ganga Dussehra 2022: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस तिथि पर मां गंगा धरती पर आईं थी। इसी कारण से इसे गंगा अवतरण दिवस भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में गंगा का विशेष महत्व होता है। सभी तरह के पूजा,अनुष्ठानों और धार्मिक क्रियाकालापों में गंगाजल का प्रयोग अवश्य ही किया जाता है। इस बार गंगा दशहरा का त्योहार 9 जून, गुरुवार को है। मान्यता है कि गंगा दशहरा पर जो भी व्यक्ति गंगा स्नान करता है उसके दस तरह के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इस बार गंगा दशहरा पर चार बड़े शुभ योग बन रहे हैं। ऐसे में इन शुभ योग में गंगा पूजन और स्नान का महत्व काफी बढ़ गया है। 
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Ganga Dussehra 2020: गंगा दशहरा के दिन गुरु-चंद्रमा और मंगल का द्दष्टि संबंध बन रहा है इस कारण से गजकेसरी और महालक्ष्मी योग का संयोग है। - फोटो : अमर उजाला
गंगा दशहरा और चार बड़े शुभ योग
इस बार ज्योतिष गणना के अनुसार गंगा दशहरा की तिथि पर ग्रह-नक्षत्रों के शुभ संयोग से मिलकर चार बहुत ही अच्छे और शुभ फल देने वाले शुभ योग बन रहे हैं। गंगा दशहरा के दिन गुरु-चंद्रमा और मंगल का द्दष्टि संबंध बन रहा है इस कारण से गजकेसरी और महालक्ष्मी योग का संयोग है। इसके अलावा वृष राशि में सू्र्य-बुध की युति से बुधादित्य योग बनेगा और पूरे दिन रवियोग रहेगा। ऐसे में गंगा दशहरा पर गंगा स्नान और पूजा से 10 गुना शुभ फल की प्राप्ति होगी।
 
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Ganga Dussehra - फोटो : अमर उजाला
गंगा स्नान का महत्व
शास्त्रों के अनुसार गंगा अवतरण के इस पावन दिन गंगा जी में स्नान एवं पूजन-उपवास करने वाला व्यक्ति दस प्रकार के पापों से छूट जाता है। इनमें से तीन प्रकार के दैहिक,चार वाणी के द्वारा किए हुए एवं तीन मानसिक पाप,ये सभी गंगा दशहरा के दिन पतितपावनी गंगा स्नान से धुल जाते हैं।गंगा में स्नान करते समय स्वयं श्री नारायण द्वारा बताए गए मन्त्र-''ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः'' का स्मरण करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
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ganga dussehra - फोटो : अमर उजाला
गंगा स्नान और पूजन का विधान
ज्येष्ठ माह की दशमी तिथि पर पवित्र गंगा स्नान करने की परंपरा है। गंगा दशहरा पर पास में स्थित किसी पवित्र गंगा नदी में स्नान अवश्य करें लेकिन किसी कारण गंगा स्नान संभव न हो तो सुबह जल्दी उठकर नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिलाकर स्नान कर लें।  स्नान करने के बाद भगवान के नाम का जाप और गरीबों का दान अवश्य करें। गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालुजन जिस भी वस्तु का दान करें, उनकी संख्या दस होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें, उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए, ऐसा करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। दक्षिणा भी दस ब्राह्मणों को देनी चाहिए। जब गंगा नदी में स्नान करें, तब दस बार डुबकी लगानी चाहिए। 
 
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