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Ganga Dussehra 2021: क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा का पर्व, जानिए महत्व

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गंगा दशहरा 2021: यह माना जाता है कि जब मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं तो वह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी, तभी से इस तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। - फोटो : अमर उजाला
सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी के कमंडल से राजा भागीरथ द्वारा देवी गंगा को धरती पर अवतार दिवस को गंगा दशहरा के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी पर अवतार से पहले गंगा नदी स्वर्ग का हिस्सा थीं। गंगा दशहरा के दिन भक्त देवी गंगा की पूजा करते हैं और गंगा में डुबकी लगाते हैं और दान-पुण्य, उपवास, भजन और गंगा आरती का आयोजन करते हैं। मान्यता है इस दिन मां गंगा की पूजा करने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होती है। हिन्दू धर्म में तो गंगा को देवी मां का दर्जा दिया गया है। यह माना जाता है कि जब मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं तो वह ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी, तभी से इस तिथि को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है।  ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान समय में भौतिक जीवन जी रहे मनुष्य से जाने अनजाने जो पाप कर्म हो जाते हैं उनकी मुक्ति के लिए मां गंगा की साधना करनी चाहिए। कहने का तात्पर्य है जिस किसी ने भी पापकर्म किये हैं और जिसे अपने किये का पश्चाताप है और इससे मुक्ति पाना चाहता है तो उसे सच्चे मन से मां गंगा की पूजा अवश्य करनी चाहिये। इस वर्ष लॉकडाउन और कोरोना को देखते हुए घर मे ही स्वच्छ जल में थोड़ा गंगा जल मिलाकर मां गंगा का स्मरण कर उससे भी स्नान कर सकते हैं।
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गंगा दशहरा में लें संकल्प

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ganga snan, ganga dussehra - फोटो : अमर उजाला
दुनिया की सबसे पवित्र नदियों में एक है गंगा। गंगा के निर्मल जल पर लगातार हुए शोधों से भी गंगा विज्ञान की हर कसौटी पर भी खरी उतरी विज्ञान भी मानता है कि गंगाजल में कीटाणुओं को मारने की क्षमता होती है जिस कारण इसका जल हमेशा पवित्र रहता है। हमारी सनातन संस्कृति में गंगा को मां का स्थान दिया गया है। सदियों से समस्त मानव समाज इस मां रूपी पवित्र जल का उपयोग करता है और हमें इसके लिए अपनी गंगा मां का कृतार्थ होना चाहिए किन्तु पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में विकास के नाम पर जिन प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया गया है, उनमें गंगा नदी-जल के साथ कई प्रदूषित तत्व मिलाए गए और मिलाये जा रहें हैं।
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ganga dussehra - फोटो : अमर उजाला
हमें समझने की आवश्यकता है कि गंगा केवल जलधारा ही नहीं अपितु जनजीवन और लोक-संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। गंगा सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के साथ-साथ विकास की भी जननी रही हैं। वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर समस्या है। देश के कई राज्यों में ग्रीष्मकालीन समय आते ही यह भयावह होने लगता है क्योंकि हमने अपनी बूँद-बूँद सहेजने वाली पूर्वजों की जल-संस्कृति को तिलांजलि दे दी है वर्तमान समय में जल की दोहरी समस्या है एक तो पर्याप्त मात्रा में पेयजल बचा नहीं है और जो बचा हुआ है उसका रूप-रंग और स्वाद तेजी से बदल रहा है और इन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार एकमात्र इंसान है और हमें इस बात को गम्भीरता से समझना होगा।
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Ganga Dussehra - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष शास्त्र में चन्द्रमा जल तत्व का कारक है यदि हम अपने दैनिक जीवन में जल को दूषित करेंगे, जल का संरक्षण नहीं करेंगे तो हमारा मन अशान्त और चित्त दूषित होगा और हमारा जीवन अशान्त होगा। इसलिए गंगा को प्रदूषण से बचाकर हम अपने कुंडली में चन्द्र ग्रह को मजबूत कर सकते हैं और अपने चित्त को प्रसन्न और स्वस्थ रह सकते हैं। गंगा दशहरा में हम सभी को यह संकल्प लेना होगा गंगा की सफाई, स्वच्छता में हम सभी पूर्ण सहयोग करेंगे क्योंकि गंगा की सफाई हेतु हम सबका एकीकृत होना वर्तमान की एक बड़ी ज़रूरत है। और सही मायने में यही मां गंगा की सच्ची सेवा और उपासना होगी।
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