दिव्या आचार्य
Ganeshotsav 2025 Significance: वेदों और गणेश पुराण जैसे धर्म ग्रंथों में मानव जीवन के पथ को आलोकित करने तथा जीवन-कौशल की सिद्धि के लिए श्रीगणेश का सिद्धिविनायक स्वरूप सर्वथा वंदनीय और आराध्य है।
वेदों की ऋचाओं और गणेश पुराण जैसे जीवन-दर्शन से भरे ग्रंथों में भगवान गणेश का सिद्धिविनायक रूप जीवन के श्रेय पथ और दक्षता प्राप्ति का प्रतीक है। यही कारण है कि जीवन के प्रत्येक शुभारंभ में गणपति का स्मरण किया जाता है।
शुभता और सिद्धि के देवता
हर मांगलिक कार्य की शुरुआत हम श्रीगणेश की वंदना से करते हैं। भगवान शिव ने स्वयं कहा है- “सभी विघ्नों को नष्ट करने हेतु गणपति का पहले स्मरण अनिवार्य है।” गणेश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्तियां समाहित हैं। ज्ञान और कला की साधना में भी वे प्रथम पूज्य हैं। नृत्य और कला से जुड़े लोग नृत्य गणपति की आराधना करते हैं, जबकि सिद्धिविनायक रूप से वे बुद्धि, विवेक और सफलता के प्रतीक बनते हैं।