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Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी पर स्थापना करते वक्त भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा फल

Fri, 22 Aug 2025 11:29 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Avoid These Things on Ganesh Chaturthi: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए हर शुभ काम से पहले उनकी पूजा अनिवार्य होती है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, पूजा के समय यदि कुछ जरूरी नियमों का पालन न किया जाए तो उसका फल सही रूप में नहीं मिलता। 
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गणेश स्थापना नियम - फोटो : adobe stock
Ganesh Chaturthi Niyam: गणेश चतुर्थी का त्योहार पूरे भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 27 अगस्त 2025 से शुरू होगा, जब भक्त अपने घरों, दफ्तरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना कर विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करेंगे। यह पर्व अनंत चतुर्दशी तक चलता है, जो 6 सितंबर 2025 को समाप्त होगा।
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भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए हर शुभ काम से पहले उनकी पूजा अनिवार्य होती है। लेकिन शास्त्रों के अनुसार, पूजा के समय यदि कुछ जरूरी नियमों का पालन न किया जाए तो उसका फल सही रूप में नहीं मिलता। आइए जानते हैं, गणेश स्थापना और पूजा के दौरान किन 7 गलतियों से बचना चाहिए ताकि आपकी पूजा सफल और फलदायक हो सके।Laddu Gopal Chatti 2025: लड्डू गोपाल की छठी पर करें ये विशेष भोग अर्पण, पढ़ें पूरी पूजा विधि
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अगर मूर्ति का मुख किसी अनिष्ट दिशा की ओर रखा जाए तो यह घर में अशांति और परेशानी ला सकता है। - फोटो : freepik
मूर्ति का मुख गलत दिशा में रखना
गणेश जी की मूर्ति स्थापना के समय इसका मुख हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। इस दिशा को सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। अगर मूर्ति का मुख किसी अनिष्ट दिशा की ओर रखा जाए तो यह घर में अशांति और परेशानी ला सकता है।
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गणेश जी की मूर्ति को सीधे फर्श या जमीन पर स्थापित करना शुभ नहीं माना जाता। - फोटो : freepik
मूर्ति को सीधे जमीन या फर्श पर रखना
गणेश जी की मूर्ति को सीधे फर्श या जमीन पर स्थापित करना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से मूर्ति की ऊर्जा प्रभावित होती है। मूर्ति को लकड़ी की चौकी, लाल या पीले रंग के साफ वस्त्र पर स्थापित करें। यह परंपरा पूजा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और धार्मिक नियमों के अनुरूप होती है। इससे पूजा की सफलता सुनिश्चित होती है।

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एक ही स्थान पर एक मूर्ति की स्थापना करना शुभ होता है। - फोटो : Adobe stock
एक से अधिक मूर्तियों की स्थापना करना
कई बार लोग घर या पंडाल में एक से अधिक गणेश जी की मूर्तियों की स्थापना कर देते हैं, जो उचित नहीं है। एक ही स्थान पर एक मूर्ति की स्थापना करना शुभ होता है। एक से ज्यादा मूर्तियां रखने से पूजा का प्रभाव कमजोर हो जाता है और श्रद्धालुओं के मन में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। यह पूजा के फल को भी कम कर सकता है।
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टूटी-फूटी या अधूरी मूर्ति का उपयोग करना अशुभ माना जाता है। - फोटो : freepik
अधूरी या  खंडित मूर्ति का प्रयोग
पूजा के लिए हमेशा पूरी, सुन्दर और ठीक स्थिति में मौजूद मूर्ति का ही चयन करें। टूटी-फूटी या अधूरी मूर्ति का उपयोग करना अशुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति नकारात्मक ऊर्जा ला सकती है और पूजा का प्रभाव भी कम हो सकता है। इसलिए मूर्ति की दशा ठीक होनी चाहिए और उसकी शुद्धि का भी ध्यान रखें।
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गणेश जी को तुलसी और केतकी के फूल अर्पित करना मना है। - फोटो : freepik
तुलसी और केतकी के फूल चढ़ाना वर्जित
गणेश जी को तुलसी और केतकी के फूल अर्पित करना मना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये फूल उनके लिए अशुभ माने जाते हैं। गणेश जी को दूर्वा घास, लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल के फूल) और मोदक जैसे प्रसाद अर्पित करना शुभ होता है। इससे उनकी पूजा में खास मान्यता मिलती है और उनकी कृपा प्राप्त होती है।
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पूजा के दौरान शंख का बजाना शुभ माना जाता है, लेकिन गणेश पूजा में दक्षिणावर्ती शंख बजाना वर्जित है। - फोटो : Adobe Stock
दक्षिणावर्ती शंख बजाना नहीं चाहिए
पूजा के दौरान शंख का बजाना शुभ माना जाता है, लेकिन गणेश पूजा में दक्षिणावर्ती शंख बजाना वर्जित है। दक्षिणावर्ती शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं और पूजा का शुभ फल प्रभावित होता है। इसलिए पूजा में हमेशा सामान्य या उत्तरावर्ती शंख का ही प्रयोग करें।
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बिना पूजा-पाठ के, जल्दबाजी में या नियमों की अनदेखी कर विसर्जन करना अशुभ माना जाता है।
विसर्जन के समय नियमों का पालन न करना
गणेश चतुर्थी की पूजा का समापन विसर्जन से होता है, जिसे पूरी विधि-विधान और मंत्रोच्चारण के साथ करना चाहिए। बिना पूजा-पाठ के, जल्दबाजी में या नियमों की अनदेखी कर विसर्जन करना अशुभ माना जाता है। सही मंत्रों के साथ श्रद्धा से विसर्जन करने से गणपति की कृपा बनी रहती है और आने वाले समय में सुख-समृद्धि आती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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