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Ganesh Chaturthi 2020: तुलसी के इस श्राप के कारण हुआ था गणपति महाराज का विवाह

Tue, 18 Aug 2020 07:40 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : अमर उजाला
Ganesh Chaturthi 2020: गणेश चतुर्थी पर्व भगवान गणेश जी का जन्मोत्सव है। भारत में यह त्योहार बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी पर्व 22 अगस्त को मनाया जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल यह पर्व भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। हिन्दू पूजा-पद्धति में सबसे पहले गणपति महाराज की पूजा की जाती है। भगवान गणेश जी के विवाह से जुड़ी एक रोचक कथा का वर्णन मिलता है जो इस प्रकार है.…
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गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं, गणेश जी अपने शरीर के बनावट से परेशान रहते थे। एक बार वह तपस्या में लीन थे उसी दौरान वहां से तुलसी जी गुजर रही थी। वह गणेश जी को देख मोहित हो गईं। तुलसी ने गणेश जी से शादी करने का प्रस्ताव रखा। गणेश जी ने ब्रह्मचारी बताकर प्रस्ताव को मना कर दिया। इस बात से नाराज होकर तुलसी ने उन्हें दो शादी होने का श्राप दिया। इसी शाप की वजह से भगवान गणेश की पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं होता है।
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गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : SELF
दूसरी कथा के अनुसार गणेश जी अपने हाथी जैसै मुंह और मोटे पेट से परेशान रहते थे। उन्हें लगता था अगर मेरा विवाह नहीं होगा तो मैं किसी और की भी शादी नहीं होने दूंगा। जिसके बाद गणेश जी बाकी अन्य देवताओं की शादी में जाकर विघ्न डालने का काम करते थे।

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गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : अमर उजाला
गणेश जी के इस व्यवहार से बाकी देवता परेशान हो गए थे, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इस काम में गणेश जी का साथ उनके वाहन मूषक ने भी दिया था। 
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गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : ANI
सभी देवता अपनी परेशानी लेकर ब्रह्माजी के पास गए। गणेश जी की सारी बातों को बताया। इसके बाद ब्रह्माजी अपनी दो मानस पुत्रियां रिद्धि और सिद्धि को लेकर गणेश जी के पास पहुंचे और उन्हें शिक्षा देने को कहा। जब भी गणेश जी के पास शादी की खबर आती रिद्धि और सिद्धि उनका ध्यान कहीं और लगा देती थीं।
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ganesh chaturthi 2020 - फोटो : ANI
एक दिन जब इस बात का पता गणेश जी को लगा कि बिना किसी रुकावट के सभी का विवाह अच्छे से संपन्न हो गया तो वह गुस्सा होते हैं तभी वहां ब्रह्मा जी आकर रिद्धि-सिद्धि से विवाह का प्रस्ताव गणेश जी के सामने रखते हैं। फिर गणेश जी खुशी-खुशी प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं। गणेश जी के साथ बेहद धूमधाम से रिद्धि-सिद्धि का विवाह संपन्न होता है।
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