बुध प्रदोष व्रत, 28 अगस्त
प्रदोष का व्रत भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और व्रती को पुत्री की प्राप्ति होती है। जिस दिन त्रयोदशी तिथि होती है, प्रदोष व्रत को उसी नाम से जाना जाता है। जैसे रवि प्रदोष, सोम प्रदोष, भौमप्रदोष आदि। सभी पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष के व्रत का विधान शास्त्रों में बताया गया है। इस दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और अद्य अहं कृपाप्राप्त्यै सोमप्रदोषव्रतं करिष्ये मंत्र को पढ़कर व्रत का संकल्प लें फिर शिवजी का पूजा-अर्चना करें। और पूरे दिन उपवास रखें। शाम के वक्त एक बार फिर स्नान करें और महादेव की अर्चना कर अन्न ग्रहण करें।