फरवरी माह में मौसम बेहद ही सुहावना होता है। इस महीने बसंत ऋतु वातावरण में अपनी छटा बिखेरती है। इस महीने कई व्रत एवं त्योहार पड़ने वाले हैं। फरवरी 2020 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत एवं त्योहार इस प्रकार हैं..
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सूर्य देव
01 फरवरी, शनिवार, रथ सप्तमी
हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ महीने में शुक्ल पक्ष सप्तमी को रथ सप्तमी या माघ सप्तमी के रूप में जाना जाता है। सप्तमी तिथि भगवान सूर्य को समर्पित है, सूर्य को सात सफेद घोड़ों वाले रथ पर विराजमान माना गया है।
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महाभारत
- फोटो : Twitter
02 फरवरी, रविवार, भीष्म अष्टमी
हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी के नाम से जाना जाता है। भीष्म अष्टमी एक हिंदू त्योहार है जो महान भारतीय महाकाव्य महाभारत के भीष्म को समर्पित है।
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जया एकादशी
05 फरवरी, बुधवार, जया एकादशी
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास की शुक्ल एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। जया एकादशी को भगवान विष्णु की आराधना की जाती है और उपवास किया जाता है।
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प्रदोष व्रत की विधि
07 फरवरी, शुक्रवार, प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। पुराणों के अनुसार इस व्रत को करने से बेहतर स्वास्थ और लम्बी आयु की प्राप्ति होती है।
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माघ पूर्णिमा
- फोटो : अमर उजाला
09 फरवरी, रविवार, माघ पूर्णिमा
हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा कहते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस तिथि पर स्नान, दान और जप को बहुत पुण्य फलदायी बताया गया है।
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विजया एकादशी
19 फरवरी, बुधवार, विजया एकादशी
एकादशी तिथि हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इसे समस्त पापों का हरण करने वाली तिथि भी कहा जाता है। यह अपने नाम के अनुरूप फल भी देती है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी विजया एकादशी कहलाती है।
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महा शिवरात्रि
- फोटो : SOCIAL MEDIA
21 फरवरी, शुक्रवार, महाशिवरात्रि
शास्त्रों में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की आराधना करने से समस्त दोषों और ग्रहों के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिल जाती है और शिव कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
23 फरवरी, रविवार, फाल्गुन अमावस्या
फाल्गुन अमावस्या का शास्त्रों में अत्यधिक महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि फाल्गुन अमास्या पर देवताओं का निवास संगमत तट पर होता है। अतः इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान कर देवों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।