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Eid-ul-Adha 2020: बकरीद आज, इस कारण मनाया जाता है यह त्योहार

Sat, 01 Aug 2020 06:21 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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बकरीद 2020 - फोटो : amar ujala
Eid-ul-Adha 2020: ईद-उल-अजहा को बकरीद के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार एक अगस्त को मनाया जाएगा। ईद की तारीख चांद के दीदार से तय होती है। ईद-उल-अजहा इस्लाम मजहब का एक प्रमुख त्योहार है। कुरान में भी इस त्योहार का जिक्र आता है। बकरीद कुर्बानी का त्योहार है। इस बार कोरोना काल में बकरीद के त्योहार की रौनक फीकी रहेगी। बहरहाल, जानते हैं इस त्योहार के इतिहास के बारे में विस्तार से।  
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बकरीद 2020 - फोटो : amar ujala
अल्लाह ने मांगी थी हजरत इब्राहिम से सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी
इस्लाम मजहब की मान्यता के अनुसार, कहा जाता है अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी। हजरत इब्राहिम अपने बेटे से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया। अल्लाह के हुक्म की फरमानी करते हुए हजरत इब्राहिम ने जैसे ही अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी। कहते हैं तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा। इसलिए ईद-उल-अजहा यानी बकरीद हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है। 
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बकरीद 2020 - फोटो : amar ujala
ईद-उल-अजहा में इनकी दी जाती है कुर्बानी
बकरीद का पर्व इस्लाम के पांचवें सिद्धान्त हज को भी मान्यता देता है। बकरीद के दिन मुस्लिम बकरा, भेड़, ऊंट जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं। इसमें उस पशु की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है जिसके शरीर का कोई हिस्सा टूटा हुआ हो, भैंगापन हो या जानवर बीमार हो बकरीद के दिन कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक खुद के लिए, दूसरा सगे-संबंधियों के लिए और तीसरे हिस्से को गरीब लोगों में बांटे जाने का चलन है।
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बकरीद की नमाज अदा करते लोग - फोटो : अमर उजाला
इस तरह से मनाया जाता है यह त्योहार
बकरीद पर इस्लाम धर्म के लोग साफ-पाक होकर नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ते हैं। नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी दी जाती है। ईद के मौके पर लोग अपने रिश्तेदारों और करीबों लोगों को ईद की मुबारकबाद देते हैं। ईद की नमाज में लोग अपने लोगों की सलामती की दुआ करते हैं। एक-दुसरे से गले मिलकर भाईचारे और शांति का संदेश देते हैं। बाजारों में भी रौनक दिखाई देती है।
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