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Sankashti Chaturthi: 4 या 5 फरवरी कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी? जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Wed, 04 Feb 2026 12:15 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

February Sankashti Chaturthi 2026: माघ माह के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 - फोटो : Amar Ujala
Dwijpriya Sankashti Chaturthi 2026: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन-वैभव बना रहता है। हर महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी का अलग नाम होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 5 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 की तिथि - फोटो : freepik
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 4 फरवरी, बुधवार की रात 12 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी और 5 फरवरी, गुरुवार की रात 12 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। चतुर्थी तिथि का चंद्र उदय 5 फरवरी को होगा, इसलिए इसी दिन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। इस दिन सुकर्मा, धृति और मातंग नामक योग भी बन रहे हैं।
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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त - फोटो : freepik
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
सुबह 11:17 से दोपहर 12:40 तक
दोपहर 12:18 से 01:02 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:40 से 02:03 तक
दोपहर 02:03 से 03:26 तक
शाम 06:12 से 07:49 तक
संकष्टी के दिन चन्द्रोदय - रात 09:35 बजे

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि - फोटो : freepik
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
  • 5 फरवरी, गुरुवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर व्रत नियमों का पालन करें।
  • शुभ मुहूर्त में घर के किसी साफ स्थान पर चौकी रखकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान को तिलक लगाएं, पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं।
  • इसके बाद रोली, चावल, अबीर, गुलाल, कुमकुम, वस्त्र, जनेऊ, पान और नारियल अर्पित करें।
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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि - फोटो : freepik
  • पूजा में दूर्वा जरूर चढ़ाएं और अपनी श्रद्धा अनुसार भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में भगवान गणेश की आरती करें।
  • चंद्रमा के दर्शन होने पर जल से अर्घ्य दें और पुष्प अर्पित करें।
  • मान्यता है कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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