Diwali 2025: रौशनी और उमंगों का पर्व दिवाली 20 अक्तूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों के वनवास से अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से यह पर्व दीपों के उत्सव यानी दिवाली के रूप में मनाया जाता है। यह न केवल रौशनी का पर्व है बल्कि दिवाली प्रेम, आनंद और नई शुरुआत का प्रतीक भी होती हैं। मान्यता है कि यह दिन सभी के जीवन में नई उम्मीदें, सकारात्मक ऊर्जा और प्रकाश को लेकर आता है। इसलिए इस दिन घरों से लेकर मंदिरों में धन की देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधानपूर्वक पूजा की जाती है। इससे घर में सुख-समृद्धि, सौभाग्य, प्रेम तथा यश-वैभव बना रहता है। हालांकि, लक्ष्मी पूजन हमेशा संपूर्ण विधि से करना चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल मिलता है। ऐसे में आइए लक्ष्मी पूजन की विधि और महत्व को जानते हैं।