कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस बार दिवाली 7 नवंबर को है। घर में सुख-शान्ति और धन-संपदा प्राप्त करने के लिए इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। शास्त्रों में देवी लक्ष्मी की पूजा करते समय कुछ नियम बताए गए हैं अगर इनकी अनदेखी की जाती है और पूजा में ध्याल नहीं रखा जाता तो धन की देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं इसलिए देवी लक्ष्मी की पूजा करते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
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tulsi
- फोटो : अमर उजाला
देवी लक्ष्मी की पूजा में भूलकर भी तुलसी के पत्तों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इसके पीछे कुछ वजहें बताई गई हैं। भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय होती है लेकिन देवी लक्ष्मी को तुलसी से वैर है क्योंकि यह भगवान विष्णु के दूसरे स्वरूप शालिग्राम की पत्नी है। इस नाते तुलसी देवी लक्ष्मी की सौतन हैं।
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देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए दीपक की बाती का रंग लाल होना चाहिए और दीपक को मूर्ति के दायीं ओर रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि भगवान विष्णु अग्नि और प्रकाश के स्वरूप हैं, इसलिए भगवान विष्णु का स्वरूप होने के कारण दीपक को दायीं ओर रखना शुभ होता है।
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दिवाली में लक्ष्मी पूजन करते समय सफेद फूल देवी को नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि देवी लक्ष्मी चिर सुहागन हैं इसलिए हमेशा लाल फूल जैसे लाल गुलाब और लाल कमल फूल ही चढ़ाएं।
देवी लक्ष्मी की पूजा तब तक सफल नहीं मानी जाती है जब तक भगवान विष्णु की पूजा नहीं होती है। इसलिए दीपावली की शाम गणेश जी की पूजा के बाद देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी पूजा करें। इसके अलावा देवी लक्ष्मी की पूजा के समय प्रसाद दक्षिण दिशा में रखें और फूल और माला हमेशा सामने रखें।