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Dhanteras 2025: धनतेरस पर करें भगवान धन्वंतरि, कुबेर और यमराज जी की इस विधि से पूजा, करें इन मंत्रों का जाप

Sat, 18 Oct 2025 05:30 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धनतेरस का यह पर्व आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन इनकी पूजा का बड़ा महत्व है। आइए जानते हैं धनतेरस की पूजा विधि मंत्र और कथा...
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dhanteras 2025 - फोटो : Amar Ujala
Dhanteras Puja Vidhi 2025: पांच दिवसीय दीपावली उत्सव के पहले दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। यह दिन आयु, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस कारण इस दिन उनकी पूजा करने का विधान है। साथ ही धन के अधिपति कुबेर देव और मृत्यु के देवता यमराज की आराधना भी की जाती है। कुबेर की कृपा से धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, जबकि यमराज की उपासना अकाल मृत्यु से रक्षा करती है। इसलिए धनतेरस का यह पर्व आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन इनकी पूजा का बड़ा महत्व है। आइए जानते हैं धनतेरस की पूजा विधि मंत्र और कथा...

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धनतेरस पूजन का शुभ मुहूर्त - फोटो : freepik
धनतेरस पूजन का शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ- 18 अक्तूबर दोपहर 12:18 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त- 19 अक्तूबर दोपहर 01:51 बजे
प्रदोष काल - शाम 05:48 बजे से रात 08:19 बजे तक
वृषभ काल - शाम 07:15 बजे से रात 09:11 बजे तक

धनतेरस पूजा शुभ मुहूर्त - शाम 07:15 बजे से रात 08:19 बजे तक 
अवधि- 01 घंटा 04 मिनट
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भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि
धनतेरस के दिन प्रदोष काल में भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर उनकी आराधना करने से उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा भी की जाती है। दीप जलाने से पहले खील या चावल रखकर उसके ऊपर दीपक रखें। शुद्ध जल से आचमन कराएं और रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, फल, नैवेद्य व दक्षिणा अर्पित कर भगवान से अपने रोगों के नाश की प्रार्थना करें।

परिवार में सुख और दीर्घायु के लिए पूजा के समय इस मंत्र का जाप करें-
‘ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः।’

धन्वंतरि मंत्र
ॐ धन्वंतरये नमः॥

मंत्र
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये
अमृतकलश हस्ताय सर्वरोगनिवारणाय सर्वभय विनाशाय
त्रिलोकनाथाय श्रीमहाविष्णुस्वरूप श्रीधन्वंतरये नमः॥

 

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भगवान कुबेर की पूजा विधि - फोटो : amar ujala
भगवान कुबेर की पूजा विधि
कुबेर देव को धन और वैभव का अधिपति माना गया है। धनतेरस के दिन सायंकाल उत्तर दिशा में कुबेर यंत्र स्थापित करें, उस पर गंगाजल छिड़कें, रोली-चावल से तिलक लगाएं, पुष्प अर्पित करें और दीपक जलाएं। फिर इस मंत्र का जाप करें... 

“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥”


इसके बाद कुबेर जी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

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यमराज की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
यमराज की पूजा विधि
वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा बताया गया है। धनतेरस की संध्या को प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार पर दक्षिणमुख होकर अन्न की ढेरी पर तेल का चारमुखी दीपक जलाना शुभ माना गया है। यह दीप यमदेव को समर्पित होता है। दीप जलाते समय यमराज से प्रार्थना करें कि वे परिवार को अकाल मृत्यु और संकटों से सुरक्षित रखें।

यमराज मंत्र
मृत्युना दंडपाशाभ्याम् कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रयतां मम॥

मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीतयामिति॥
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धनतेरस की पौराणिक कथा - फोटो : Amar Ujala
धनतेरस की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था। इसी दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। उन्होंने देवताओं को अमृत प्रदान किया, जिससे वे अमर हो गए। तभी से कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को धन्वंतरि जयंती और धनतेरस के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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