देवशयनी एकादशी की शाम को, विशेष रूप से प्रदोष काल में भगवान विष्णु को शयन कराया जाता है।
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देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को शयन कराने की विधि
देवशयनी एकादशी की शाम को, विशेष रूप से प्रदोष काल में भगवान विष्णु को शयन कराया जाता है। इस दिन श्रद्धा अनुसार भगवान विष्णु की मूर्ति चाहे सोने, चांदी, तांबे या फिर कागज से बनी हो, घर के पूजा स्थान पर स्थापित करें। फिर भजनों और मंत्रों के साथ उनका पूजन करें। पूजा के बाद एक सुंदर, सजी हुई शय्या (बिस्तर) तैयार करें और उसी पर भगवान को विराजमान करें। इसके साथ ही विशेष शयन मंत्रों का जाप करें, जिससे भगवान योगनिद्रा में प्रवेश करें। शयन के समय भगवान के समीप फल, मिष्ठान और सूखे मेवे अर्पित करना भी शुभ माना गया है। इस रात्रि जागरण करना अत्यंत पुण्यकारी होता है, जिसमें भजन-कीर्तन, भगवान की लीलाओं का स्मरण और सत्संग किया जाता है।