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Devshayani Ekadashi 2025: इस साल कब है देवशयनी एकादशी? यहां जानें तिथि और पूजा विधि

Mon, 02 Jun 2025 11:52 AM IST
शिखर बरनवाल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देवशयनी एकादशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसे चातुर्मास कहा जाता है। आइए जानते हैं किस दिन देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी।
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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
Devshayani Ekadashi 2025: देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र दिनों में से एक है। यह पावन पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है, जो मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, और उनके इस शयनकाल को 'चातुर्मास' कहा जाता है।

चातुर्मास की अवधि में सभी प्रकार के मांगलिक कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नए व्यवसाय का शुभारंभ आदि वर्जित माने जाते हैं। इस दौरान भक्तगण जप-तप, ध्यान और धार्मिक अनुष्ठानों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, क्योंकि यह समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी होता है। देवशयनी एकादशी का यह पर्व हमें भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का संदेश देता है, जो जीवन में संतुलन और शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और पारण का सही समय क्या है। साथ ही देवशयनी एकादशी की पूजा विधि और जाप मंत्र भी जानेंगे।
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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
देवशयनी एकादशी 2025 की तिथि और समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी 2025 आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाएगी। इस साल यह पर्व 6 जुलाई 2025, रविवार को होगा। एकादशी तिथि 5 जुलाई को शाम 6:58 बजे शुरू होगी और 6 जुलाई को रात 9:14 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार 6 जुलाई को ही यह व्रत रखा जाएगा। पारण (व्रत तोड़ने) का समय 7 जुलाई को सुबह 5:29 बजे से 8:16 बजे तक रहेगा। इस दिन सूर्य मिथुन राशि में होगा, और चातुर्मास की शुरुआत होगी, जो 1 नवंबर तक चलेगा।


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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
संक्षेप में देवशयनी एकादशी 2025 तिथि
  • देवशयनी एकादशी तिथि प्रारम्भ: 5 जुलाई 2025, शाम 6:58 बजे  
  • देवशयनी एकादशी तिथि समाप्त: 6 जुलाई 2025, रात 9:14 बजे  
  • व्रत की तिथि: 6 जुलाई 2025 (उदया तिथि के अनुसार)  
  • पारण समय: 7 जुलाई 2025, सुबह 5:29 बजे से 8:16 बजे तक

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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
देवशयनी एकादशी की पूजा विधि
देवशयनी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें, फिर विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी पत्र, और पंचामृत अर्पित करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद देवशयनी एकादशी की कथा सुनें और भगवान को केले का भोग लगाएं। पूजा के बाद दीप जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। अंत में प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंदों को दान दें। यह व्रत निर्जला या फलाहारी हो सकता है, जिसमें अनाज और नमक से परहेज करें।
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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
देवशयनी एकादशी का महत्व
देवशयनी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, जिससे साधक के पाप नष्ट होते हैं और सुख-समृद्धि मिलती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा से बैकुंठ की प्राप्ति होती है। चातुर्मास में भक्ति, दान और सात्विक जीवन जीने पर जोर दिया जाता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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