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आखिर बनारस में ही क्यों देव दिवाली? ये हैं 6 वजह

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देव दिवाली का पर्व दीपावली के 15 दिन बाद मनाया जाता है
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक का महीना बहुत शुभ होता है और विशेष फल देने वाला होता है। कार्तिक महीने में दान पुण्य और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक कई त्योहार आते हैं जिसमें अंतिम त्योहार देव दिवाली कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। देव दिवाली का पर्व दीपावली के 15 दिन बाद मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 12 नवंबर, यानी आज है। देव दिवाली का यह उत्सव उत्तर प्रदेश के बनारस शहर में बड़े भव्य तरीके से मनाया जाता है। देव दिवाली के बनारस में इतने भव्य तरीके से मनाए जाने के पीछे ये 6 कारण है।
 
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पंचगंगा घाट
 देव दिवाली की परंपरा की शुरुआत पंचगंगा घाट पर 1915 में हजारो की संख्या में दिये जलाकर की गई थी, तभी से बनारस में भव्य तरीके से घाटो पर दीये सजाए जाते हैं।
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बनारस में मनाया जाने वाला यह उत्सव करीब तीन दशक पहले कुछ लोगों के प्रयासों से शुरू हुआ
बनारस में मनाया जाने वाला यह उत्सव करीब तीन दशक पहले कुछ लोगों के प्रयासों से शुरू हुआ। नारायण गुरु नामक एक सामाजिक कार्यकर्ता ने युवाओं की टोली बनाकर कुछ घाटों से इसकी शुरूआत की और फिर धीरे-धीरे दूसरे घाटों तक यह फैलता हुआ करीब एक दशक पूर्व अपने ऐसे भव्य रूप में आ चुका है।

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शहीदों को समर्पित देव दिवाली
काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन इतने भव्य तरीके से मनाई जाने वाली देव दिवाली शहीदों को समर्पित होती है।
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सभी देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया था - फोटो : Instagram
एक अन्य मान्यता के अनुसार तीनों लोको में त्रिपुरासुर राक्षस का आंतक था। तब भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी में पहुंच कर त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर सभी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इससे प्रसन्न होकर सभी देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया था।
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बनारस के घाटों पर दीपों का उत्सव - फोटो : Instagram
पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के कुछ दिन पहले देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा के बाद जागते हैं। जिसकी खुशी में सभी देवता स्वर्ग से उतरकर बनारस के घाटों पर दीपों का उत्सव मनाते हैं।
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दीपावली के 15वें दिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली मनाई जाती है
ऐसी एक अन्य मान्यता है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी अपने प्रभु भगवान विष्णु से पहले जाग जाती हैं, इसलिए दीपावली के 15वें दिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली मनाई जाती है।
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