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Chhath Puja 2025: छठ पूजा में सूप का इस्तेमाल क्यों किया जाता है? जानिए इस परंपरा की शुरुआत और महत्व

Fri, 24 Oct 2025 04:58 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Chhath Puja Mein Soop Ka Mahatv: छठ पूजा में सूप और दउरा का विशेष महत्व है, जिनमें पूजा सामग्री सजाकर घाट तक ले जाई जाती है । कारीगर इन्हें बड़ी कुशलता से तैयार करते हैं, ताकि सामग्री सुरक्षित और सुंदर तरीके से अर्पित हो सके।
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छठ पूजा 2025 - फोटो : amar ujala
Chhath Puja Soop Importance: उत्तर प्रदेश, बिहार और देश के कई राज्यों में लोक आस्था का महान पर्व छठ बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। दुर्गा पूजा समाप्त होते ही लोग इस पावन पर्व की तैयारियों में लग जाते हैं और चारों ओर छठ की झलक और भक्ति का माहौल देखने को मिलता है।
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छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति की उपासना का प्रतीक भी है, जिसमें फल, फूल और अन्य पूजन सामग्रियों का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष छठ महापर्व 25 अक्तूबर से आरंभ होगा और 28 अक्तूबर को उषा अर्घ्य के साथ इसका समापन होगा। छठ पूजा में सूप और दउरा (चंगेला/डलिया) का विशेष महत्व है। छठी मइया को अर्पित की जाने वाली सभी फल, फूल और पूजन सामग्री इन्हीं सूप और दउरा में सजाकर घाट तक ले जाई जाती हैं। इन सूप और दउरा को बनाने वाले कारीगर बड़ी कुशलता और निपुणता के साथ तैयार करते हैं, ताकि पूजा के समय सभी सामग्री सुरक्षित और सुंदर तरीके से अर्पित की जा सके।
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छठ पूजा करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा में सूप का महत्व
छठ पूजा के दौरान बांस से बनी कई वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है, जिनमें सूप का विशेष स्थान है। सूप सूर्य पूजा का अभिन्न हिस्सा माना जाता है और इसके बिना यह अनुष्ठान अधूरा रहता है। सूर्य को अर्घ्य देने के समय सूप का उपयोग किया जाता है, जिसमें अक्सर फल और ठेकुआ जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ रखी जाती हैं।
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सूप और परिवार पर प्रभाव - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
सूप और परिवार पर प्रभाव
ऐसी मान्यता है कि जो दंपत्ति श्रद्धापूर्वक छठ मैया की पूजा करते हैं, उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। निःसंतान दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति होती है और पूरे परिवार में खुशियों का वातावरण बनता है।

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छठ पूजा की प्रक्रिया और बांस का महत्व - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा की प्रक्रिया और बांस का महत्व
छठ पूजा मुख्यतः तीन दिनों तक मनाई जाती है।  नहाय-खाय, खरना और संध्या अर्घ्य। इस दौरान एक सख्त प्रक्रिया का पालन किया जाता है और बांस की टोकरियों का विशेष महत्व होता है। प्राचीन समय में प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता था और बांस आसानी से उपलब्ध होने के कारण इसे पूजा के लिए प्राथमिक विकल्प माना गया।
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सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि - फोटो : freepik
सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि
कुछ लोग मानते हैं कि आदिवासी रीति-रिवाजों में बांस का विशेष सांस्कृतिक महत्व है और इसका प्रयोग पूजा-अर्चना में बड़े श्रद्धा के साथ किया जाता है। सूर्य देव को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना जाता है, और तेजी से बढ़ने वाला बांस सूर्य की ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
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सूप की विशेषता - फोटो : अमर उजाला
सूप की विशेषता
छठ पूजा में प्रयुक्त सूप पारंपरिक रूप से एक खास किस्म के बांस से बनाए जाते हैं। ये न केवल अर्घ्य देने के लिए उपयोग होते हैं, बल्कि प्रसाद रखने के लिए भी अत्यंत उपयुक्त होते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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