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Chaitra Pradosh 2025: प्रदोष व्रत पर साध्य और शुभ योग का संयोग, ऐसे पाएं महादेव की विशेष कृपा

Wed, 19 Mar 2025 03:00 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chaitra Pradosh 2025: भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन प्रभु की उपासना करने से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत होता है, साथ ही शिव जी की कृपा से साधक के वैवाहिक जीवन में भी मधुरता बनी रहती है।
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Chaitra Pradosh 2025 - फोटो : अमर उजाला
Chaitra Pradosh 2025: भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन प्रभु की उपासना करने से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत होता है, साथ ही शिव जी की कृपा से साधक के वैवाहिक जीवन में भी मधुरता बनी रहती है। यह व्रत मुख्य रूप से परिवार की सुख-समृद्धि, डर भय की समाप्ति, रोग व दोषों से मुक्ति पाने के लिए रखा जाता है। इस दौरान कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए भी प्रदोष व्रत रखती हैं।

वहीं वर्तमान में चैत्र महीना जारी है और इस माह के कृष्ण पक्ष में यह व्रत 27 मार्च 2025 के दिन रखा जाएगा। इस तिथि पर कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है, जो शिव परिवार की पूजा के लिए बेहद शुभ है। ऐसे में आइए इस दिन की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में जानते है...
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इस वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 मार्च 2025 की रात 1 बजकर 42 मिनट पर होगी - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत की तिथि
इस वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 26 मार्च 2025 की रात 1 बजकर 42 मिनट पर होगी। यह तिथि 27 मार्च को रात 11: 03 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए 27 मार्च को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
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पंचांग के मुताबिक प्रदोष व्रत के दिन शतभिषा नक्षत्र बन रहा है। - फोटो : freepik
शुभ योग
पंचांग के मुताबिक प्रदोष व्रत के दिन शतभिषा नक्षत्र बन रहा है। इस दिन साध्य योग भी बनेगा, जो सुबह 9: 24 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुभ योग का निर्माण होगा।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सबसे पहले सुबह ही स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
  • अब प्रदोष काल में सबसे पहले एक चौकी लें।
  • इसपर भोलेनाथ की मूर्ति स्थापित कर दें।
  • इस दौरान आप पूरे शिव परिवार की मूर्ति को भी रख सकते हैं।
  • अब शिवलिंग पर शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • फिर महादेव को बेलपत्र और भांग चढ़ाएं।
  • देवी को फूलों की माला अर्पित करें।
  • अब दीया जलाएं और मंत्रों का जाप करें।
  • शिव जी की आरती करना शुरू करें।
  • अंत में पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे।
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भगवान शिव की आरती - फोटो : freepik
भगवान शिव की आरती 
जय शिव ओंकारा ऊँ जय शिव ओंकारा । 
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। 
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। 
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी। 
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। 
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । 
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। 
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी। 
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । 
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ 
ऊँ जय शिव...॥ 
जय शिव ओंकारा हर ऊँ शिव ओंकारा। 
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ऊँ जय शिव ओंकारा...॥  



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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