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Chaitra Navratri Day 9: आज महानवमी पर करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें स्वरूप, पूजा विधि, मंत्र और भोग

Fri, 27 Mar 2026 12:29 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Maa Siddhidatri Ki Puja Vidhi: नवरात्रि का आखिरी दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। मां सिद्धिदात्री की आराधना करने से पूरे नौ दिनों की उपासना का फल मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि, मंत्र, उनका स्वरूप, पौराणिक कथा और पूजा का महत्व।
  
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मां सिद्धिदात्री की पूजा - फोटो : Amar Ujala
Navratri 2025 Day 9 Maa Siddhidatri Puja: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को नवरात्रि का समापन होता है। यह दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। पूरे नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन यदि किसी कारणवश कोई साधक पूरे नौ दिनों तक व्रत या पूजा नहीं कर पाता, तो वह नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से मां सिद्धिदात्री की आराधना करके भी विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों के जीवन से कष्टों और बाधाओं को दूर करती हैं और उनके सभी कार्यों को सफल बनाती हैं।

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मां सिद्धिदात्री का स्वरूप - फोटो : Amar Ujala
मां सिद्धिदात्री का स्वरूप
मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। उनके हाथों में गदा, चक्र, कमल और शंख विराजमान रहते हैं। मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान होती हैं। मां का स्वरूप अत्यंत शांत, दिव्य और कल्याणकारी है, जो भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है।
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पूजा विधि - फोटो : Amar Ujala
पूजा विधि
  • नवमी के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान से निवृत्त हो जाएं। 
  • इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल को शुद्ध करके मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उस पर गंगाजल छिड़कें। 
  • फिर रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, फल, मिष्ठान, नारियल और चुनरी अर्पित करें। 
  • इसके पश्चात मां के मंत्रों का जप करते हुए उनका ध्यान करें।
  • इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन और नौ कन्याओं का पूजन करना चाहिए।
 

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मां सिद्धिदात्री के मंत्र - फोटो : amar ujala
मां सिद्धिदात्री के मंत्र
“सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥”

‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
 ॐ सिद्धिदात्री देव्यै नमः’ 

 
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मां सिद्धिदात्री के प्रिय भोग - फोटो : adobe stock
मां सिद्धिदात्री के प्रिय भोग
मां सिद्धिदात्री को प्रसन्न करने के लिए उन्हें हलवा, पूड़ी और चना का भोग लगाना विशेष रूप से फलदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त खीर, नारियल, सफेद मिठाइयां और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। श्रद्धा से अर्पित किया गया भोग मां को अत्यंत प्रिय होता है।

पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचारों से देवता अत्यंत परेशान हो गए थे, तब वे भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास सहायता के लिए पहुंचे। इसके बाद सभी देवताओं के तेज से मां सिद्धिदात्री का प्राकट्य हुआ। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं। इसी कारण उनका आधा शरीर देवी के स्वरूप में परिवर्तित हो गया और वे अर्धनारीश्वर के रूप में पूजित हुए।
 
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पूजा का महत्व और फल - फोटो : adobe
पूजा का महत्व और फल
मान्यता है कि नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से पूरे नवरात्रि के व्रत और साधना के बराबर फल मिलता है। उनकी कृपा से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है और उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं। साथ ही, नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव भी समाप्त होता है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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