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Pitru Paksha 2025: क्या महिलाएं कर सकती हैं श्राद्ध ? जानिए क्या कहता है गरुड़ पुराण

Sat, 13 Sep 2025 10:34 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Can Women Do Shradh: यदि घर में कोई पुरुष न हो तो महिलाएं संकल्प लेकर श्राद्ध कर सकती हैं। विशेष परिस्थितियों में महिलाओं को भी शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म करने का अधिकार होता है, जिससे वे पितरों की तृप्ति और मुक्ति सुनिश्चित कर सकती हैं।
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Pitru Paksha 2025 - फोटो : amar ujala
पं. विश्वास पाठक

Can Women Do Shradh: श्राद्ध कर्म महिलाएं भी कर सकती हैं, खासकर जब घर में कोई पुरुष न हो। शास्त्रों में इसके लिए कुछ नियम बताए गए हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि घर में कोई पुरुष न हो तो महिलाएं संकल्प लेकर श्राद्ध कर सकती हैं। विशेष परिस्थितियों में महिलाओं को भी शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म करने का अधिकार होता है, जिससे वे पितरों की तृप्ति और मुक्ति सुनिश्चित कर सकती हैं।
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Pitru Paksha 2025 - फोटो : adobe stock
किन परिस्थितियों में महिलाएं कर सकती हैं श्राद्ध
  • कुल में पति या पिता या कोई पुरुष सदस्य न हो। पुरुष हो, लेकिन वह श्राद्ध कर्म करने की स्थिति में न हो, अर्थात वह गंभीर रूप से अस्वस्थ हो, विदेश में हो, उसकी मानसिक स्थिति ठीक न हो या कुपात्र हो।
  • महिला अपने सास-ससुर, जेठ-जेठानी का श्राद्ध कर सकती है। यही नहीं, वह अपने माता-पिता का भी श्राद्ध कर सकती है, यदि उनके कोई पुत्र न हो। इसके अलावा महिला के श्राद्ध कर्म करने में कुछ अन्य शर्तें भी शास्त्रों में बताई गई हैं। मसलन, यदि घर में कोई वृद्ध महिला हो तो वह जवान महिला से पहले श्राद्ध कर्म करने की उत्तराधिकारी होगी।
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Pitru Paksha 2025 - फोटो : adobe stock
नियम भी कुछ खास
महिलाएं श्राद्ध कर सकती हैं, मगर वे कुश और जल के साथ तर्पण नहीं कर सकतीं। काले तिलों से तर्पण करने का उन्हें अधिकार प्राप्त नहीं है, क्योंकि महिला को उत्पन्ना माना गया है। वह तर्पण का प्रतीक नहीं है। श्राद्ध करने से नाबालिग लड़कियों को रोका गया है, लेकिन विवाहित महिलाएं श्राद्ध करने की पात्र हैं। पति या पुत्र बीमार है तो उसके हाथ का स्पर्श कराकर महिला श्राद्ध कर्म कर सकती है।

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Pitru Paksha 2025 - फोटो : अमर उजाला
यदि जातक के वंश में कोई श्राद्ध करने वाला न हो, कुपुत्र हो, उसे लगे कि उसका श्राद्ध कर्म कोई नहीं करेगा तो वह जीते जी अपना और पूर्वजों का श्राद्ध कर सकता है। लेकिन यदि गोत्र में कोई पुरुष सदस्य है तो वह इसे करने का उत्तराधिकारी नहीं है। इस व्यवस्था को दुरूह बनाया गया है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि पितरों के परिवार में ज्येष्ठ या कनिष्ठ पुत्र अथवा पुत्री भी न हो तो नाती, भतीजा, भांजा या शिष्य तिलांजलि और पिंडदान करने के पात्र होते हैं। अगर इनमें से कोई भी है तो व्यक्ति को अपना श्राद्ध कर्म स्वयं नहीं करना चाहिए।

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Pitru Paksha 2025 - फोटो : सोशल मीडिया
आपको यदि अपने पूर्वजों की तिथि याद नहीं है तो इस प्रकार कर सकते है- बच्चे का श्राद्ध पंचमी को, बुजुर्ग महिला-पुरुष का नवमी को करें। यदि यह भी नहीं कर पाते हैं तो सभी पितरों का स्मरण कर सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने से सभी पितरों को भोज मिल जाता है। वैसे श्राद्ध कर्म को लेकर विभिन्न शास्त्रों का अलग-अलग मत भी है, इसलिए बेहतर होगा कि आप जिस क्षेत्र में संबंध रखते हों, वहां से संबंधित किसी ज्ञानी से श्राद्ध की जानकारी ले लें, ताकि मन में कोई दुविधा न रहे।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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