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Diwali 2025: दिवाली पर पुराने दीपक दोबारा जलाना शुभ होता है या अशुभ? जानिए क्या कहते हैं शास्त्र

Sun, 19 Oct 2025 01:50 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Diwali Old Diyas: दिवाली पर दीप जलाना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक है। पुराने दीयों के पुनः उपयोग को लेकर शास्त्रों में कुछ नियम हैं जिन्हें जानना और पालन करना ज़रूरी है।
 
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दिवाली पर दीये जलाने की सही विधि क्या मानी जाती है। - फोटो : amar ujala
Old Diya Lighting Good or Bad: दिवाली, जिसे रोशनी का पर्व कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में एक अत्यंत पावन और उल्लासपूर्ण त्योहार है। यह सिर्फ दीप जलाने या मिठाइयाँ बाँटने का पर्व नहीं है, बल्कि अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग अपने घरों को साफ-सुथरा कर दीपों से सजाते हैं और माँ लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करके सुख, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं।
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हालाँकि, जब बात दीयों की आती है, तो बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या पुराने, पिछले वर्ष के मिट्टी के दीयों या किसी अन्य पूजा में उपयोग किए गए दीयों को फिर से दिवाली पर जलाना उचित होता है? क्या ऐसा करना शुभ है या इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है? इन सवालों को समझना जरूरी है, क्योंकि पूजा-पद्धति में शुद्धता और विधि का विशेष महत्व होता है। आइए जानें कि इस बारे में धर्मशास्त्र और परंपरा क्या कहते हैं और दिवाली पर दीये जलाने की सही विधि क्या मानी जाती है।
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दिवाली की मुख्य पूजा में उपयोग किए गए मिट्टी के दीयों को दोबारा जलाना शुभ नहीं माना जाता। - फोटो : freepik
क्या दिवाली पर पुराने दीये दोबारा जलाने चाहिए?
  • दिवाली की मुख्य पूजा में उपयोग किए गए मिट्टी के दीयों को दोबारा जलाना शुभ नहीं माना जाता।
  • मान्यता है कि पूजा में इस्तेमाल हुए दीये नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेते हैं, इसलिए उनका पुनः उपयोग वर्जित है।
  • केवल सजावट या रोशनी के लिए उपयोग किए गए दीयों को, यदि वे पूजा में शामिल न हुए हों, तो साफ करके दोबारा जलाया जा सकता है।
  • यम दीपक के रूप में पुराने दीये का दोबारा उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह विशेष परिस्थिति में होता है।
  • धनतेरस या नरक चतुर्दशी की रात, यमराज के लिए जलाए गए दीपक को सरसों के तेल से फिर से जलाना शुभ माना जाता है।
  • यह दीपक परिवार को अकाल मृत्यु से बचाने के उद्देश्य से जलाया जाता है।
  • धार्मिक दृष्टिकोण से शुद्धता बनाए रखने के लिए पूजा में हमेशा नए दीयों का ही प्रयोग करना चाहिए।
  • पर्यावरण के दृष्टिकोण से, यदि दीया पूजा में प्रयोग नहीं हुआ है, तो उसका पुनः उपयोग करना एक सकारात्मक कदम हो सकता है।
     
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इन्हें हर बार उपयोग से पहले अच्छे से धोकर, अग्नि से शुद्ध करना चाहिए। - फोटो : adobe stock
धातु के दीपकों के नियम 
  • पीतल, चांदी या अन्य धातु से बने दीपक पूजा में बार-बार इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
  • इन्हें हर बार उपयोग से पहले अच्छे से धोकर, अग्नि से शुद्ध करना चाहिए।
  • इन दीपकों का पुनः प्रयोग न सिर्फ शुभ माना जाता है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार भी दर्शाता है।
  • किसी भी प्रकार का टूटा या खंडित दीपक दिवाली या अन्य पूजा में नहीं जलाना चाहिए।

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पूजा के बाद मिट्टी के दीयों को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें या पीपल/तुलसी के नीचे श्रद्धापूर्वक रखें। - फोटो : adobe stock
पुराने मिट्टी के दीयों का क्या करें?
  • पूजा के बाद मिट्टी के दीयों को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें या पीपल/तुलसी के नीचे श्रद्धापूर्वक रखें।
  • यदि विसर्जन न करें, तो इन दीयों को घर की सजावट या कलात्मक कार्यों में उपयोग कर सकते हैं। पूजा के लिए दोबारा न जलाएं।
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दिवाली पर दीपक हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाना चाहिए। - फोटो : adobe stock
दीपक जलाने के नियम 
  • दिवाली पर दीपक हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाना चाहिए। 
  • घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाते समय उसकी लौ अंदर की ओर होनी चाहिए। 
  • धनतेरस या छोटी दिवाली पर जलाया जाने वाला यम दीपक दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाना शुभ होता है। 
  • दीपकों की संख्या विषम रखनी चाहिए, जैसे 5, 7, 9, 11, 21, 51 या 108, क्योंकि विषम संख्या शुभ मानी जाती है। 
  • पूजा की शुरुआत मंदिर में पहला दीपक जलाने से करनी चाहिए, और घी का दीपक तेल वाले दीपक से अधिक शुभ माना जाता है। 
  • दीपक घर के मुख्य द्वार, बैठक कक्ष, रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने, तुलसी के पौधे के पास, पीपल के पेड़ के नीचे और छत या बालकनी पर जलाना चाहिए। 
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक दीपक से दूसरा दीपक जलाना अशुभ होता है, इसलिए हर दीपक अलग से जलाना चाहिए। 
  • पूजा के दौरान दीपक को किसी भी तरह से बुझने नहीं देना चाहिए और हाथ या फूंक मारकर दीपक को बुझाना देवी लक्ष्मी का अनादर माना जाता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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