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भाद्रपद पूर्णिमा 2026: 26 सितंबर को मनाई जाएगी पूर्णिमा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Tue, 15 Sep 2026 12:17 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 में 26 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा, दान-पुण्य और चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना जाता है। जानें पूर्णिमा की तारीख, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
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भाद्रपद पूर्णिमा - फोटो : amar ujala

हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद माह की पूर्णिमा को भाद्रपद पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण कथा, दान-पुण्य और चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। खास बात यह है कि भाद्रपद पूर्णिमा के साथ ही पितृ पक्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। ऐसे में यह तिथि धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आइए जानते हैं 2026 में भाद्रपद पूर्णिमा कब है, पूजा के शुभ मुहूर्त क्या हैं और इस दिन कौन से उपाय किए जा सकते हैं।

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भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है? - फोटो : Freepik

भाद्रपद पूर्णिमा 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा तिथि 25 सितंबर 2026 की रात 11:06 बजे शुरू होगी और 26 सितंबर की रात 11:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर भाद्रपद पूर्णिमा का व्रत और धार्मिक अनुष्ठान 26 सितंबर 2026 को किए जाएंगे। इस दिन चंद्रमा का उदय शाम करीब 6:09 बजे होगा। पूर्णिमा की रात चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विशेष महत्व माना जाता है।

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26 सितंबर को पूजा के शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe

26 सितंबर को पूजा के शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:46 बजे से 5:33 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:23 बजे से 3:11 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:24 बजे से 6:48 बजे तक
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 12:46 बजे तक

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भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व - फोटो : Freepik
भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अनाज और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भी इस दिन श्रद्धा से धार्मिक कार्य किए जाते हैं।
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चंद्रमा को अर्घ्य देने की मान्यता - फोटो : adobe stock

चंद्रमा को अर्घ्य देने की मान्यता
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था में दिखाई देते हैं, इसलिए चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा विशेष मानी जाती है। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद एक पात्र में स्वच्छ जल लेकर उसमें थोड़ा कच्चा दूध मिलाएं और श्रद्धापूर्वक चंद्र देव को अर्पित करें। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन की अशांति कम होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस उपाय को आर्थिक स्थिति में स्थिरता और पारिवारिक सुख के लिए भी लाभकारी माना जाता है।

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भाद्रपद पूर्णिमा पूजा विधि - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

भाद्रपद पूर्णिमा पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करें, अन्यथा घर के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु और सत्यनारायण की विधिवत पूजा की तैयारी करें।
  • पूजा में पुष्प, धूप, दीप, फल, मिठाई और जल आदि सामग्री रखें।
  • सबसे पहले भगवान विष्णु को पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या विष्णु स्तोत्र का पाठ करें और सत्यनारायण कथा का श्रवण करें।
  • भाद्रपद पूर्णिमा पर पितरों का तर्पण भी किया जाता है। इसके लिए जल, दूध, तिल और कुशा का प्रयोग करें।
  • तर्पण करते समय पितरों का स्मरण करें और उनकी शांति एवं कृपा की प्रार्थना करें।
  • शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रदेव को अर्घ्य दें। जल में चावल और पुष्प डालकर चंद्रमा को अर्पित करें।
  • चंद्रदेव की पूजा करके मनोकामना पूर्ति और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • पूजा के बाद पंचामृत और चूरमे का प्रसाद बनाकर परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटें।
  • अंत में अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराएं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
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भाद्रपद पूर्णिमा पर क्या करें? - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भाद्रपद पूर्णिमा पर क्या करें?
  • इस दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करें।
  • पूजा स्थल पर दीपक जलाकर विष्णु भगवान की आराधना करें।
  • संभव हो तो सत्यनारायण भगवान की कथा सुनें।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
  • शाम के समय चंद्र देव को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामना की प्रार्थना करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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