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Bhadli Navami 2023: भड़ली नवमी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Tue, 27 Jun 2023 07:43 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भड़ली नवमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व - फोटो : istock
Bhadli Navami 2023: हर साल आषाढ़ महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी का पर्व मनाया जाता है। भड़ली नवमी को भडल्या नवमी, कंदर्प नवमी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस साल भड़ली नवमी कल यानी 27 जून, मंगलवार को है। भड़ली नवमी विवाह या मांगलिक कार्यों के लिए उत्तम तिथि मानी जाती है। शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश, नया काम शुरू करने के लिए भड़ली नवमी का दिन इस सीजन का आखिरी दिन होता है। इसके बाद देवशयनी एकादशी आती है और चार महीने के लिए शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल भड़ली नवमी पर शुभ कार्य करने और पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है...

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भड़ली नवमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व - फोटो : iStock
भड़ली नवमी 2023 तिथि
पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 27 जून की तड़के 2 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 28 जून को तड़के 3 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि 27 जून को प्राप्त हो रही है इसलिए भड़ली नवमी 27 जून को ही मनाई जाएगी।
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भड़ली नवमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व - फोटो : iStock
अबूझ मुहूर्त
भड़ली नवमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। यानी इस दिन अक्षय तृतीया के समान ही आप बिना मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा इस दिन किसी भी चीज की खरीदारी, नए कारोबार की शुरुआत और गृह प्रवेश भी बिना कोई मुहूर्त देखे किया जा सकता है।

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भड़ली नवमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व - फोटो : iStock
भड़ली नवमी पूजा विधि
  • भड़ली नवमी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर घर की साफ सफाई करें।
  • फिर स्नान करके साफ कपड़े पहने और फिर विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • भड़ली नवमी की पूजा में धूप-दीप करें, फल-फूल का भोग लगाएं।
  • साथ ही भगवान विष्णु को हल्दी या फिर केसर में रंगे हुए अक्षत चढ़ाएं।
  • पूजा के दौरान ॐ श्री लक्ष्मी-नारायणाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
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भड़ली नवमी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व - फोटो : iStock
भड़ली नवमी का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान विष्णु शयनावस्था में होते हैं तब कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। भगवान विष्णु योग निद्रा में जाने से पहले भड़ली नवमी का दिन भक्तों को देते हैं ताकि वह अपने बचे हुए शुभ कार्य इस दिन कर लें। भड़ली नवमी किसी भी धार्मिक कार्य के लिए आखिरी दिन होता है। इसके बाद कोई भी शुभ नहीं किए जाते हैं। इसके बाद एक दिन बाद देवशयनी एकादशी से चतुर्मास लग जाते हैं।
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