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Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर क्यों पहने जाते हैं पीले रंग के वस्त्र? जानें महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

Wed, 21 Jan 2026 12:10 PM IST
ज्योति मेहरा पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य

सार

माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस पर्व और बसंत ऋतु का महत्व और माता सरस्वती के पूजन की विधि। इसके साथ ही जानेंगे कि इस पर्व में पीले रंग का क्या महत्व है। 
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वसंत पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त - फोटो : Amar Ujala
Basant Panchami 2026: प्रति वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। पंचमी तिथि किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह पंचमी माता सरस्वती को समर्पित है। पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को रात 02:28 बजे शुरू होगी और 24 जनवरी 2026 (शनिवार) को रात 01:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 शुक्रवार को मनाई जाएगी। वसंत पंचमी पर पूजन का शुभ मुहूर्त प्रातः काल 6 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।

Basant Panchami 2026: वसंत पंचमी पर अर्पित करें मां सरस्वती के प्रिय भोग, बनेंगे सफलता के योग
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मां सरस्वती - फोटो : adobestock
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता की उत्पत्ति का उद्देश्य इस ब्रह्माण्ड को वाणी और ज्ञान देना था। कहते हैं जिनकी जिव्हा पर सरस्वती देवी का वास होता है, वे ज्ञान और विद्या के धनी होते हैं। इनके बिना एक मनुष्य का जीवन अंधकारमय होता है। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती पूजन और व्रत करने से वाणी मधुर होती है, स्मरण शक्ति तीव्र होती है और विद्या में कुशलता प्राप्त होती है। वसंत का सीधा सा अर्थ है सौन्दर्य, शब्द का सौन्दर्य, वाणी का सौंदर्य, प्रकृति का सौंदर्य, प्रवृत्ति का सौंदर्य, वसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, बुद्धि और नए आरंभ का दिव्य संकेत है।
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Basant Panchami - फोटो : अमर उजाला
प्रकृति के आंचल में जब अनेकानेक पुष्प मुस्कारते हैं, जब कोयल की कूक कानों में मिठास घोलती है, जब पेड़ पुष्प अपना परिधान बदलते हैं और जब वाणी मधुरता का अमृतपान कराती है, तो सुनते देखते ही पहला शब्द निकलता है वाह... अद्भुत... विलक्षण.. अनुपम, वास्तव में यही वसंत है तभी तो इसे रितुराज की संज्ञा दी गई है।
रितु विचिका में दो ऐसे मास हैं, जो हमारे मन को सीधे सीधे प्रभावित करते हैं, एक सावन और दूसरा वसंत, दोनो ही मास को साहित्य, समाज, समरसता, संगीत और सकारात्मकता से जोड़ा गया है। कालीदास से लेकर आज तक के अनेक रचनाकारों को ये मास आनंदित करते हैं।

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मां सरस्वती - फोटो : adobestock
वसंत के पर्व का विस्तार अधिक है क्योंकि इससे और भी बहुत से सकारात्मक तत्व जुड़े हैं। मां सरस्वती वाणी एवं ज्ञान की देवी है। ज्ञान को संसार में सभी चीजों से श्रेष्ठ कहा गया है, इस आधार पर देवी सरस्वती सभी से श्रेष्ठ हैं. कहा जाता है कि जहां सरस्वती का वास होता है वहां लक्ष्मी एवं काली माता भी विराजमान रहती हैं। इसका प्रमाण है माता वैष्णो का दरबार जहॉ माँ सरस्वती,माँ लक्ष्मी,माँ काली ये तीनों महाशक्तियां साथ में निवास करती हैं. जिस प्रकार माता दुर्गा की पूजा का नवरात्रे में महत्व है उसी प्रकार वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन का महत्व है। सरस्वती पूजा के दिन यानी माघ शुक्ल पंचमी के दिन सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षक एवं छात्रगण सरस्वती माता की पूजा एवं अर्चना करते हैं. सरस्वती माता कला की भी देवी मानी जाती हैं अत: कला क्षेत्र से जुड़े लोग भी माता सरस्वती की विधिवत पूजा करते हैं. छात्रगण सरस्वती माता के साथ-साथ पुस्तक, कापी एवं कलम की पूजा करते हैं. संगीतकार वाद्ययंत्रों की, चित्रकार अपनी तूलिका की पूजा करते हैं।
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वंसत पंचमी पर पीले रंग का महत्व - फोटो : Amar Ujala
वंसत पंचमी पर पीले रंग का महत्व 
ग्रंथों के अनुसार वसंत पंचमी पर पीला रंग के उपयोग का महत्व है। क्योंकि इस पर्व के बाद शुरू होने वाली वसंत ऋतु में फसलें पकने लगती हैं और पीले फूल भी खिलने लगते हैं। इसलिए वसंत पंचमी पर्व पर पीले रंग के कपड़े और पीला भोजन करने का बहुत ही महत्व है। इस त्योहार पर पीले रंग का महत्व इसलिए बताया गया है क्योंकि वसंत का पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा, प्रकाश और आशावाद का प्रतीक है। इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, व्यंजन बनाते हैं।
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वंसत पंचमी पर पीले रंग का महत्व - फोटो : adobestock
1. सादगी और निर्मलता को दर्शाता है पीला रंग
हर रंग की अपनी खासियत है जो हमारे जीवन पर गहरा असर डालती है। हिन्दू धर्म में पीले रंग को शुभ माना गया है। पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है। पीला रंग भारतीय परंपरा में शुभ का प्रतीक माना गया है। 

2. आत्मा से जोड़ने वाला रंग
फेंगशुई ने भी इसे आत्मिक रंग अर्थात आत्मा या अध्यात्म से जोड़ने वाला रंग बताया है। फेंगशुई के सिद्धांत ऊर्जा पर आधारित हैं। पीला रंग सूर्य के प्रकाश का है यानी यह ऊष्मा शक्ति का प्रतीक है। पीला रंग हमें तारतम्यता, संतुलन, पूर्णता और एकाग्रता प्रदान करता है। 

3. सक्रिय होता है दिमाग
मान्यता है कि यह रंग डिप्रेशन दूर करने में कारगर है। यह उत्साह बढ़ाता है और दिमाग सक्रिय करता है। नतीजतन दिमाग में उठने वाली तरंगें खुशी का अहसास कराती हैं। यह आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है। हम पीले परिधान पहनते हैं तो सूर्य की किरणें प्रत्यक्ष रूप स दिमाग पर असर डालती हैं। 
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वसंत पंचमी की पौराणिक कथा - फोटो : Amar Ujala
वसंत पंचमी की पौराणिक कथा
सृष्टि की रचना के समय ब्रह्माजी ने महसूस किया कि जीवों की सर्जन के बाद भी चारों ओर मौन छाया रहता है। उन्होंने विष्णुजी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे पृथ्वी पर एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। छह भुजाओं वाली इस शक्ति रूप स्त्री के एक हाथ में पुस्तक, दूसरे में पुष्प, तीसरे और चौथे हाथ में कमंडल और बाकी के दो हाथों में वीणा और माला थी। ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, चारों ओर ज्ञान और उत्सव का वातावरण फैल गया, वेदमंत्र गूंज उठे। ऋषियों की अंतःचेतना उन स्वरों को सुनकर झूम उठी। ज्ञान की जो लहरियां व्याप्त हुईं, उन्हें ऋषिचेतना ने संचित कर लिया।तब से इसी दिन को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। 

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वसंत पंचमी पर पूजन - फोटो : adobestock
वसंत पंचमी पर पूजन
माता शारदा के पूजन के लिये भी वसंत पंचमी का दिन विशेष शुभ रहता है. इस दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को पीले-मीठे चावलों का भोजन कराया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है। मां शारदा और कन्याओं का पूजन करने के बाद पीले रंग के वस्त्र और आभूषण कुमारी कन्याओ, निर्धनों व विप्रों को देने से परिवार में ज्ञान, कला व सुख -शान्ति की वृ्द्धि होती है. इसके अतिरिक्त इस दिन पीले फूलों से शिवलिंग की पूजा करना भी विशेष शुभ माना जाता है।
 

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मां सरस्वती पूजा की विधि - फोटो : amar ujala
मां सरस्वती पूजा की विधि 
मााँ सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए. इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए. इसके बाद माता सरस्वती की पूजा करें. सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन एवं स्नान कराएं. इसके बाद माता को फूल एवं माला चढ़ाएं. सरस्वती माता को सिन्दुर एवं अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। वसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है।
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वसंत पंचमी पर इन मंत्रों का करें जाप - फोटो : amar ujala
वसंत पंचमी पर इन मंत्रों का करें जाप
* या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
* ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
* ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयंकरी. वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
* ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
* ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि. तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

देवी सरस्वती श्वेत(सफेद) वस्त्र धारण करती हैं अत: उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं. सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाए। प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदिया अर्पित करना चाहिए. इस दिन सरस्वती माता को मालपुए एवं खीर का भी भोग लगाया जाता है।

वैदिक विभूषण पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य

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