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Ashadha Amavasya 2026: कब है आषाढ़ी अमावस्या ? जानें सही तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Thu, 09 Jul 2026 04:47 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Ashadha Amavasya 2026: अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। 
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Ashadha Amavasya - फोटो : अमर उजाला
Ashadha Amavasya 2026: हिंदू धर्म में प्रत्येक अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन आषाढ़ मास की अमावस्या का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इसे आषाढ़ी अमावस्या भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, यह दिन पितरों के तर्पण व पुण्य कर्मों के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि, इस दिन किए गए दान-पुण्य से पितरों की आत्मा को शांति मिलती हैं। परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। विशेष बात यह है कि साल 2026 में आषाढ़ी अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे भौमवती अमावस्या भी कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को आने वाली अमावस्या का पुण्यफल कई गुना अधिक माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ से हनुमान जी की भी विशेष कृपा मिलती हैं। आइए जानते हैं कि, इस बार आषाढ़ माह की अमावस्या कब है।
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Ashadha Amavasya - फोटो : adobe
आषाढ़ अमावस्या 2026 कब है ?
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6 बजकर 50 मिनट से होगी। वहीं, इसका समापन 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, आषाढ़ी अमावस्या 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी।
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Ashadha Amavasya - फोटो : adobe stock
आषाढ़ अमावस्या 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
  • स्नान-दान का श्रेष्ठ समय: सुबह 4:30 बजे से 10:43 बजे तक।
  • सूर्योदय: सुबह 5:32 बजे
  • स्नान-दान का उत्तम समय: सुबह 4:30 बजे से 10:43 बजे तक
  • लाभ चौघड़िया: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
  • अमृत चौघड़िया: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक
  • पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म: दोपहर के समय करना शुभ माना गया है।

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Ashadha Amavasya - फोटो : अमर उजाला
आषाढ़ अमावस्या के दिन क्या करें?
  • आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी या घर में स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा पितरों का स्मरण करें।
  • अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान करें। ऐसा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
  • पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों के तेल या घी का दीपक जलाकर परिक्रमा करें। 
  • हनुमान चालीसा या "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • पितरों की शांति के लिए तर्पण एवं जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष महत्व माना जाता है।
  • पूरे दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें। 
  • मन को शांत रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
 

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Ashadha Amavasya - फोटो : adobe stock
पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः।

गायत्री पितृ दोष निवारण मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः।
 

पितृ स्तोत्रं पाठ 

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥

मन्वादीनां मुनीन्द्राणां सूर्याचन्द्रमसोस्तथा ।
तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि ॥

नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥

देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येsहं कृताञ्जलि: ॥

प्रजापते: कश्यपाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ॥

नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ॥

सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ॥

अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्नीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ॥

ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ॥

तेभ्योsखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतमानस:।
नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुज: ॥


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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