भस्म से होली खेलते हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला।
भभूत से खेली जाती है होली
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इस दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विशेष शृंगार किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बाबा विश्वनाथ फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी यानी महाशिवरात्रि के दिन मां पार्वती से विवाह रचाने के बाद फाल्गुन शुक्ल एकादशी पर गौना लेकर काशी आए थे। इस अवसर पर शिव परिवार की चल प्रतिमाएं काशी विश्वनाथ मंदिर में लाई जाती हैं और बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंगल वाद्ययंत्रों की ध्वनि के साथ अपने काशी क्षेत्र के भ्रमण पर अपनी जनता, भक्त, श्रद्धालुओं को यथोचित आशीर्वाद देने सपरिवार निकलते हैं। शाम के समय बाबा की पालकी उठने से पहले भभूत की होली खेली जाती है।