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Akshaya Tritiya 2020: 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया, जानिए क्यों खास होती है यह तिथि

Sun, 26 Apr 2020 02:46 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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अक्षय तृतीया 2020
अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। लोकभाषा में इसे आखातीज या वैशाख तीज भी कहा जाता है। त्रेता और सतयुग का आरम्भ भी इसी तिथि को हुआ था,इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहते हैं। भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं, वे सब अक्षय हो जाते हैं। यह तिथि सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली मानी गई है।

अक्षय तृतीया के शुभ दिन पर माँ विंध्यवासिनी का श्रृंगार करवाने के लिए नीचे दिए हुए लिंक पर अभी क्लिक करें। 
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अक्षय तृतीया पर देवी विंध्यवासिनी के श्रृंगार से जीवन की समस्याएं होंगी दूर, मिलेगा धन लाभ का आशीर्वाद : 26-अप्रैल-2020
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akshaya tritiya
मां शक्ति ने दिया आशीर्वाद
इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी पार्वती हैं। तृतीया तिथि को पार्वती जी ने अमोघ फल देने की सामर्थ्य का आशीर्वाद दिया था। उस आशीर्वाद के प्रभाव से इस तिथि को किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता। व्यापार आरम्भ, गृह प्रवेश, वैवाहिक कार्य, सकाम अनुष्ठान, दान-पुण्य, पूजा-पाठ अक्षय रहता है अर्थात वह कभी नष्ट नहीं होता।लेकिन इस दिन किए जाने वाले अनाचार,अत्याचार,दुराचार,धूर्तता आदि के कारण होने वाले पाप का कर्मफल भी इसी तरह अक्षुण्ण रहता है। इसलिए शास्त्रों  का मत है कि मनुष्य को इस दिन बहुत सावधानी से संयम नियम के साथ रहना चाहिए। यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा जाने-अनजाने में किए गए अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो ईश्वर उसके अपराधों को भी क्षमा कर देते हैं,और उसे सद्गुण प्रदान करते हैं।अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिए अर्पित कर उनसे सद्गुणों का वरदान मांगने की परंपरा भी है।

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अक्षय तृतीया पर देवी विंध्यवासिनी के श्रृंगार से जीवन की समस्याएं होंगी दूर, मिलेगा धन लाभ का आशीर्वाद : 26-अप्रैल-2020
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शास्त्रों में है इस तिथि का महत्व 
अक्षय तृतीया का स्वयं सिद्ध मुहूर्त के रूप में भी बड़ा महत्व है। बिना पंचांग देखे भी इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह,गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। धर्मराज को इस तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती कहती हैं कि कोई भी स्त्री,जो किसी भी तरह का सुख चाहती है उसे यह व्रत करते हुए नमक का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए। स्वयं में भी यही व्रत करके मैं भगवान शिव के साथ आनंदित रहती हूँ। विवाह योग्य कन्याओं को भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करना चाहिए। जिनको संतान नहीं हो रही हो वे स्त्रियां भी इस व्रत करके संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं। स्वर्ग के राजा इंद्र की पत्नी देवी इंद्राणी इसी व्रत के पुण्य प्रताप से जयंत नामक पुत्र की माँ बनी।देवी अरुंधति ने यही व्रत करके अपने पति महर्षि वशिष्ठ के साथ आकाश में सबसे ऊपर का स्थान प्राप्त किया। प्रजापति दक्ष की पुत्री रोहिणी इसी व्रत के कारण अपने पति चंद्र की सबसे प्रिय रानी रहीं।

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अक्षय तृतीया पर देवी विंध्यवासिनी के श्रृंगार से जीवन की समस्याएं होंगी दूर, मिलेगा धन लाभ का आशीर्वाद : 26-अप्रैल-2020

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वृक्षारोपण करने से मिलता है पुण्य
शास्त्रों के अनुसार इस दिन पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेने वाले एवं  पीपल,आम, पाकड़,गूलर,बरगद,आंवला,बेल,जामुन,नीम व अन्य फलदार वृक्ष लगाने से प्राणी को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। जिस प्रकार अक्षय तृतीया को लगाए गए वृक्ष हरे-भरे होकर पल्लवित-पुष्पित होते हैं उसी प्रकार इस दिन वृक्षारोपण करने वाला व्यक्ति भी प्रगति पथ की ओर अग्रसर होकर अनंत पुण्यों का भागी हो जाता है। 
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अक्षय तृतीया पर देवी विंध्यवासिनी के श्रृंगार से जीवन की समस्याएं होंगी दूर, मिलेगा धन लाभ का आशीर्वाद : 26-अप्रैल-2020
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Akshaya Tritiya
स्नान-दान करना है अतिशुभ
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर समुद्र,गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान या फिर घर में ही स्न्नान करने के बाद भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की शांत चित्त होकर पूजा करने का विधान है।इस दिन लक्ष्मीनारायण की पूजा सफ़ेद,पीले रंग के कमल या गुलाब के पुष्प से करनी चाहिए। नैवेद्ध में गेहूं,जौ,चने का सत्तू,मिश्री,नीम की कोपल,ककड़ी और चने की भीगी दाल अर्पित की जाती है। लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ ही सुख-सौभाग्य-समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन भी किया जाता है।शास्त्रों के अनुसार इस दिन दान देने वाला प्राणी सूर्यलोक को जाता है।जो इस तिथि को उपवास करता है वह रिद्धि-वृद्धि और श्री से संपन्न हो जाता है।

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