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26 अगस्त को है अजा एकादशी व्रत, इस व्रत को करने से मिलता है खोया हुआ धन

Mon, 26 Aug 2019 09:01 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : social media
हिंदू कैलेंडर के मुताबिक भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसे कामिका या अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है। इस खास मौके पर भगवान विष्णु के स्वरूप उपेन्द्र की पूजा-अर्चना की जाती है। और रात्रि जागरण भी किया जाता है। इस साल अजा एकादशी 26 अगस्त यानी की सोमवार को पड़ रही है। इस दिन व्रत रखना और पूजा करने से कई सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसलिए हम आपको इस व्रत की महत्वता के बारे में बताने जा रहे हैं।
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- फोटो : Social Media
व्रत की विधि
अजा एकादशी के दिन सूर्य के निकलने से पहले उठें और जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें। फिर पूरे घर में झाड़ू-पोछा लगाने के बाद घर में गौमूत्र का छिड़काव करें। इसके बाद शरीर पर तिल और मिट्टी का लेप लगाकर कुशा से स्नान करें। नहाने के बाद एकादशी व्रत और पूजा का संकल्प लें। संकल्प लेने के बाद दिनभर व्रत रखें, भगवान विष्णु की पूजा करें और श्रद्धा के मुताबकि दान करें। इस बात का ध्यान रखें कि व्रत में अन्न ग्रहण नहीं कर सकते हैं। लेकिन एक बार फल का सेवन जरूर कर सकते हैं। 
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पूजा करने की विधि
घर में पूजा की जगह पर या पूर्व दिशा में किसी साफ जगह पर गौमूत्र छिड़ककर वहां गेहूं रखें। फिर उस पर तांबे का लोटा यानी कि कलश रखें। लोटे को जल से भरें और उसपर अशोक के पत्ते या डंठल वाले पान रखें और उसपर नारियल रख दें। इसके बाद कलश पर या उसके पास भगवान विष्णु की मूर्ति रखें और भगवान विष्णु की पूजा करें। और दीपक लगाएं लेकिन कलश अगले दिन हटाएं।

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कलश को हटाने के बाद उसमें रखा हुआ पानी को पूरे घर में छिड़क दें और बचा हुआ पानी तुलसी में डाल दें। अजा एकादशी पर जो कोई भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है। उसके पाप खत्म हो जाते हैं। व्रत और पूजा के प्रभाव से स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। 
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इस व्रत के दौरान एकादशी की कथा सुनने से ही अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। इस व्रत को करने से ही राजा हरिशचंद्र को अपना खोया हुआ राज्य वापस मिल गया था और मृत पुत्र फिर से जीवित हो गया था। अजा एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को हजार गौदान करने के समान फल प्राप्त होते हैं।
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