पूजा के समय इस माला की रोली, अक्षत और दूध-भात से पूजा की जाती है।
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स्याहु माला क्या होती है?
अहोई अष्टमी के व्रत में स्याहु माला का खास महत्व होता है। यह माला आमतौर पर चांदी की बनी होती है, जिसमें चांदी की छोटी-छोटी मोतियों को एक लॉकेट के साथ कलावे (लाल धागे) में पिरोया जाता है। जो महिलाएं संतान की लंबी उम्र की कामना से अहोई व्रत रखती हैं, वे इस माला को विशेष रूप से धारण करती हैं। पूजा के समय इस माला की रोली, अक्षत और दूध-भात से पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस माला को दिवाली तक पहनना शुभ होता है और इससे संतान की उम्र लंबी व जीवन सुखमय बना रहता है। अहोई पूजन में इस माला को पहनने से पहले महिलाएं विधिपूर्वक इसकी पूजा करती हैं, जिससे इसका पूर्ण फल प्राप्त हो सके। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।