अहोई अष्टमी और राधा कुंड का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व
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अहोई अष्टमी और राधा कुंड का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व
राधा कुंड और श्याम कुंड का संबंध एक महत्वपूर्ण पौराणिक कथा से जुड़ा है। प्राचीन समय में यह क्षेत्र अरिष्ट वन के नाम से जाना जाता था, जहां एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस अरिष्ठासुर का आतंक फैला हुआ था। उसकी दहाड़ इतनी तीव्र और भयावह थी कि गर्भवती महिलाओं का गर्भपात तक हो जाता था। जब कंस ने उसे कृष्ण का वध करने भेजा, तो उसने गाय के बछड़े का रूप धारण किया और बालकृष्ण पर हमला किया।
कृष्ण ने उसकी पहचान कर ली और उसका वध कर दिया। हालांकि, चूंकि उसने गाय के रूप में आए जीव का वध किया था, इस कारण उस पर गौहत्या का पाप लग गया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए श्रीकृष्ण और राधारानी ने चतुर्थी की रात को दो अलग-अलग कुंडों का निर्माण किया, जिन्हें आज हम श्याम कुंड और राधा कुंड के नाम से जानते हैं।