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Pradosh Vrat: 12 या 13 जून कब रखा जाएगा अधिक मास में प्रदोष व्रत? जानें सही तिथि और पूजा का समय

Tue, 02 Jun 2026 05:49 PM IST
Jyoti Mehra ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Shukra Pradosh Vrat 2026: अधिक मीस में आने वाला प्रदोष व्रत भक्तों के लिए खास फलदायी माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस बार अधिक मास में प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।
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अधिक मास प्रदोष व्रत 2026 - फोटो : AI
Shukra Pradosh Vrat 2026 Date: सनातन परंपरा में प्रदोष व्रत का विशेष स्थान है, लेकिन जब यह व्रत अधिक मास और शुक्रवार के संयोग में आता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन को शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। अधिक मास स्वयं में ही आध्यात्मिक दृष्टि से पवित्र और दुर्लभ समय होता है, जिसे भगवान विष्णु और महादेव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर माना गया है। ऐसे में इस अवधि में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत भक्तों के लिए खास फलदायी माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस बार अधिक मास में प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा।  
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शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की तिथि - फोटो : freepik
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून को रात 7 बजकर 36 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत का पालन त्रयोदशी तिथि में प्रदोष काल में किया जाता है, इसलिए 12 जून को ही यह व्रत रखा जाएगा।
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पूजा का शुभ समय - फोटो : adobe stock
पूजा का शुभ समय
इस दिन भगवान शिव की पूजा का सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल में माना जाता है। पंचांग के अनुसार, शाम 7:36 बजे से लेकर 9:20 बजे तक का समय पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ रहेगा। इस अवधि में श्रद्धा और विधि से की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है।
 

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पूजा का शुभ समय - फोटो : adobe stock
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बना देता है। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रदोष काल में भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही अपने जीवन में सुख-समृद्धि, वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
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धार्मिक महत्व - फोटो : adobe stock
धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में आने वाला शुक्र प्रदोष व्रत साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला होता है। इस व्रत को करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है, जिससे दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और मानसिक तनाव में कमी आती है।

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