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शास्त्रों में पूजा और जाप करने के लिए बताएं गए हैं, ये नियम

Wed, 12 Aug 2020 05:56 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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पूजा करते समय नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है(प्रतीकात्मक तस्वीर)
शास्त्रों में नियम पूर्वक पूजा-पाठ करना आवश्यक माना गया है। सनातन धर्म में हर व्यक्ति पूजा अवश्य करता है। लेकिन पूजा करते समय कुछ बातों की पूरी जानकारी न होने की वजह से या भूलवश हम कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे हमें पूजा करने का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। हमारें शास्त्रों में पूजा और जाप यहां तक प्रणाम करने के नियमों के बारे में भी बताया गया है। पूजा-जाप करते समय हमें इन नियमों को ध्यान में रखना चाहिए। जानते हैं...
 
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जाप करते समय हाध को हमेशा गौमुख से ढककर रखें(प्रतीकात्मक तस्वीर)
शास्त्रों के अनुसार, अपने हाथ को हमेशा गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। साथ ही माला को हमेशा दाहिने हाथ में पकड़ना चाहिए। जाप कभी भी तेज आवाज में नहीं करना चाहिए। जहां तक संभव हो जप करते वक्त आपकी जीभ या होंठ न हिलें। मन में जाप करना बहुत अच्छा रहता है। जाप करने के बाद जिस स्थान पर आप बैठे हो उस स्थान की भूमि को स्पर्श करके प्रणाम करना चाहिए। कोई भी धार्मिक कार्य करते समय दाहिने (सीधे हाथ) का प्रयोग करना चाहिए। दान भी हमेशा सीधे हाथ से ही करना चाहिए।
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सही तरह से करें चरण स्पर्श (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : facebook
आज के समय में कुछ लोग चरण स्पर्श ऐसे करते हैं, जैसे सिर्फ कोई रस्मअदायगी कर रहें हो, लेकिन इस तरह से चरण स्पर्श नहीं करने चाहिए। मां के सामने हमेशा झुककर सही से प्रणाम करें, तो वहीं पिता को दण्डवत् प्रणाम करना चाहिए। देवी-देवताओं के सामने भी पूरी तरह झुककर दोनों हाथों से चरण स्पर्श करना चाहिए। शास्त्रों में सोते हुए व्यक्ति को चरण स्पर्श करने को वर्जित माना गया है। प्रणाम करते समय या देवी-देवताओं के सम्मुख हाथ सही प्रकार से जोड़ना चाहिए।

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एक दीपक से दूसरा दीपक प्रज्वलित नहीं करना चाहिए(प्रतीकात्मक तस्वीर)
पूजा करते समय दीपक तो सभी जलाते हैं, कभी-कभी एक से अधिक दीपक भी प्रज्वलित किए जाते हैं, लेकिन दीपक जलाते समय हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि कभी एक दीपक की बाती से दूसरा दीपक न जलाएं। दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि दीपक हमेशा देवताओं के दाहिने तरफ को रखना चाहिए। साथ ही चावल की ढेरी पर रखकर दीपक प्रजवलित करना चाहिए।
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पूजा करते समय अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए(प्रतीकात्मक तस्वीर)
पूजा करते समय हमेशा अपना मुख पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए। पूजा की सारी सामाग्री पहले से ही एकत्रित कर लेनी चाहिए, जिससे पूजा करते समय क्रम न टूटे, जल का पात्र, शंख आदि पूजन सामाग्री अपने सीधे हाथ की ओर तो वहीं पूजा में बजाने वाली घंटी और धूप को अपने बांए तरफ रखना चाहिए। सभी देवी-देवताओं को तिलक लगाने के बाद अपने तिलक लगाना चाहिए। पूजा करते समय माथे पर तिलक लगा होना चाहिए।
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शिव जी की पूजा में केतकी के फूल वर्जित माने गए हैं(प्रतीकात्मक तस्वीर)
भगवान शंकर की पूजा में हल्दी, तुलसी केतकी के फूल को वर्जित माना गया है। तो वहीं विष्णु जी को धतूरा और सूर्य भगवान की पूजा में तगर के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। मां दुर्गा को आक और मदार के फूल अर्पित नहीं करने चाहिए। गणेश जी की पूजा में दूर्वा अर्पित की जाती है लेकिन उन्हें तुलसी दल अर्पित नहीं करने चाहिए।
 
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