ज्येष्ठ मास के कृ्ष्ण पक्ष की एकादशी यानी अचला एकादशी अाज विधि-विधान से मनाई जा रही है। अचला एकादशी को अपरा भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया पूजन समस्त पापों को नष्ट कर जीवन को धन-धान्य से भर देता है।
पं. नरेंद्र दिक्षित बता रहे हैं अचला एकादशी से जुड़ी विशेष मान्यताअों के बारे में...
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डेमाे पिक
अचला एकादशी पर व्रत करने से व्यक्ति को अपार धन संपदा तो प्राप्त होती ही है साथ ही मनुष्य को बुरे कर्मों से छुटकारा मिलता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
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जानें अचला एकादशी का महत्व
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डेमाे पिक
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में स्नान अथवा गंगा तट पर पितरों को पिंड दान करने से जो फल मिलता है वैसा ही फल अपरा एकादशी व्रत करने से प्राप्त होता है। साथ ही व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और ग्रहों की दशा में भी सुधार आता है। इस दिन किया गया दान-पुण्य भी कई गुना फलदायी है।
भूल कर भी न करें एकादशी पर यह कार्य
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- इस दिन गलती से भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
- किसी भी पेड़ की टहनी या पत्ती तोड़ उसे नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।
- पूरे दिन भगवान विष्णु का जप करना चाहिए।
- एकादशी को रात्रि में सोना नहीं चाहिए।