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मिलिए उस महिला से जिसने टीम इंडिया को दिए कप्तान-उपकप्तान, देश के लिए बनी मिसाल

Wed, 08 Mar 2017 04:20 PM IST
खेमराम शर्मा/अमर उजाला, बिलासपुर
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- फोटो : फोटो: रितेश गुलेरिया, बिलासपुर
पहाड़ की इस महिला का जज्बा भी पहाड़ जैसा है। खेतों में काम कर टीम इंडिया के लिए ऐसे खिलाड़ी तैयार किए जो कप्तान और उपकप्तान बनकर भारत का नाम रोशन कर गए। देश का नाम चमकाने के लिए अपनी जमीन पर खुद ही मैदान बनवाया और देश को पांच इंटरनेशनल खिलाड़ी दिए। पूरी कहानी जान आप भी इन्हें सलाम करने को मजबूर हो जाएंगे- 
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देवभूमि हिमाचल की स्नेहलता का जज्बा काबिलेतारीफ है। बिलासपुर के बछड़ी गांव में स्नेहलता (33) ने अपनी लगन व मेहनत के दम पर ऐसा कर दिखाया, जो बड़े-बड़े कोच लाखों रुपये की सैलरी लेकर भी नहीं कर सकते। खुद एक खिलाड़ी रह चुकी स्नेहलता बड़ा मुकाम न मिल पाने पर नहीं हारी। उसने ठान लिया कि उसे कुछ अलग करके दिखाना है।
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हैंडबाल खिलाड़ी स्‍नेहलता ने हिमाचल की लड़कियों को कोचिंग देकर उन्हें तराशने की जिद्द ठान लीं। बिलासपुर के मोहरसिंघी की स्नेहलता ने अपने खेतों में सब्जियां और दालें उगाई ताकि इन खिलाड़ियों की डाइट पूरी कर सके। बिना पैसे लिए खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देना शुरू किया। अब तक उन्होंने देश को हैंडबाल के पांच अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। 

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स्नेहलता से प्रशिक्षण पाने वाली सोलन की मेनिका पॉल भारतीय टीम की कप्तान और बबिता उप कप्तान रह चुकी हैं। इनके नेतृत्व में ही टीम ने देश को गोल्ड मेडल दिलाया। स्नेहलता ने सरकार और खेल संघों की बिना किसी मदद के अपनी जमीन पर हैंडबाल का ग्राउंड बनाया जहां आज रोजाना 150 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
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इनमें ज्यादातर लड़कियां हैं। पंचायत प्रधान की मदद से उन्होंने हॉस्टल भी बनाया जिसमें प्रदेश की 23 लड़कियां रहकर प्रशिक्षण ले रही हैं। स्नेहलता खिलाडि़यों से प्रशिक्षण और हॉस्टल का एक पैसा तक नहीं लेती, उलटा अपना सारा पैसा और जीवन महिला खिलाडि़यों का कॅरिअर संवारने में लगा दिया।
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वर्तमान में वह मोरसिंघी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में राजनीति शास्त्र की प्रवक्ता हैं। स्कूल के बाद सुबह-शाम लड़कियों को प्रशिक्षण देती हैं। जो समय बचता है उसमें स्नेहलता खेती करती हैं। वह अपने खेतों में दालें, सब्जियां और मसाले उगाकर हॉस्टल को देती हैं ताकि खिलाडि़यों की दो वक्त की डाइट पूरी हो सके। प्रवक्ता के तौर पर वे जिस भी स्कूल में गईं वहां की लड़कियां उनसे हैंडबाल सीखने यहां आ रही हैं।
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बता दें कि स्नेहलता नेशनल खेल चुकी हैं। उनके पति सचिन रेलवे में हैंडबाल के खिलाड़ी हैं और देश के लिए खेल चुके हैं। स्नेहलता अपनी तीन साल की बेटी को लेकर रोजाना खेल के मैदान में पहुंच जाती हैं। पर्दे के पीछे रहकर भी स्नेहलता देश के लिए मिसाल बनी हैं। 
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स्नेहलता से प्रशिक्षण पाकर सोलन की मेनिका पॉल ने बांग्लादेश में हुई हैंडबाल प्रतियोगिता में बतौर भारतीय कप्तान देश का प्रतिनिधित्व किया। मेनिका के नेतृत्व में भारत ने स्वर्ण पदक जीता। सोलन की ही बबिता ने बतौर उप कप्तान जीत में अहम भूमिका निभाई। निधि शर्मा के अलावा दीक्षा ठाकुर और ममता भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। पांचों खिलाड़ी स्वीडन में हुए पार्टिले कप में भी खेल चुके हैं। दिल्ली में हुई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। 
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