96 घंटे, न खाने को अन्न और न ही प्यास बुझाने को पानी। घुप अंधेरे में काल कोठरी के समान फोरलेन एक्सप्रेस हाइवे की टनल में फंसे तीन मजदूर जिंदगी की लालसा में जद्दोजहद कर रहे थे। जिंदा रहने की उम्मीद अब टूटने लगी थी।
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चमत्कार! 96 घंटे बाद जिंदा मिले, कहा हम ठीक है खाना भेजो
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भरोसा था तो सिर्फ रेस्क्यू टीमों पर और एक चमत्कार का। चमत्कार
हुआ भी। टनल के अंदर फंसे तीन में से दो मजदूरों के जिंदा होने की खबर
मिलते ही पूरा हिमाचल खुशी से झूम उठा।
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बीआरओ के अधिशासी अभियंता आरएस राव से माइक्रोफोन पर टनल में फंसे सतीश और मणिराम ने कहा कि वे ठीक हैं, जल्दी खाना भेजो।
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दोनों
मजदूर शनिवार से ही टनल में फंसे हुए हैं। मलबा गिरने की खबर के बाद सेना
और एनडीआरएफ को बुलाया गया मगर जब दोनों ने अपने हाथ खींच लिए तो लगा कि
तीनों मजदूर अब शायद ही जिंदा बचेंगे।
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मगर बीआरओ ने रेस्क्यू
ऑपरेशन जारी रखा। पहाड़ी के उपर से टनल में छेद किया गया। कैमरा डालकर जो
तस्वीरें सामने आई, उससे सबके चेहरे खिल गए। दो मजदूर जिंदा टनल में मौजूद
हैं।
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इनसे बात होने के बाद रेस्क्यू टीम ने पाइप के जरिये खाने में
उनको ड्राई फ्रूट, बिस्कुट, जूस और दवाइयां दीं। बुधवार रात 8.40 बजे जैसे
ही मजदूरों के जिंदा होने की सूचना मिली तो परिजनों के साथ-साथ जिला
प्रशासन, बीआरओ, हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी, आईएल एंड एसएफ के जवानों की
जान में जान आई।
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लगभग 96 घंटे से फोरलेन के लिए बन रही टनल-4
में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू टीम कड़ी मशक्कत रंग लाई है।
अब बीआरओ की अगुवाई में चल रहे ऑपरेशन के तहत जिंदा मजदूरों को बाहर
निकालने के लिए इंजीनियर पहाड़ को भेदकर एनडीआरएफ के जवानों को टनल के अंदर
उतारेंगे।
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इसके लिए लगभग डेढ़ मीटर गोलाई की पाइप पहाड़ी से सीधा
टनल में डाली जाएगी। इंजीनियरों के अनुसार इस प्रक्रिया को पायलट होल कहा
जाता है।
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टनल के ठीक ऊपर पहाड़ी पर पायलट होल बनाने के लिए विशेष तकनीक की ड्रिलिंग मशीन गुड़गांव से बुलाई गई है। दूसरा विकल्प टनल में मलबे के बीच पाइप डालकर फंसे मजदूरों को बाहर निकालने का है। फोटो व इनपुटः अभिषेक सोनी/संजय शर्मा (बिलासपुर)
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काम आई ऊपर से कैमरा पहुंचाने की तकनीक रेस्क्यू
ऑपरेशन के दौरान टीमों को लगा कि नीचे के रास्ते से मजदूरों तक पहुंचना
मुश्किल है क्योंकि रास्ते में कई ऐसी मशीनें भी दबी पड़ी हैं, जिनसे टनल
की खुदाई का काम किया जा रहा था। ऐसे में फैसला लिया गया कि अब पहाड़ी के
ऊपर से ड्रिलिंग कर टनल के अंदर बंद मजदूरों का पता लगाया जाए। बुधवार देर
शाम ये तरकीब रंग लाई और दो मजदूरों के जिंदा होने का पता चल गया।