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बर्फबारी का कहर, दो लोगों ने गंवाई जान, लाखों की संपत्ति तबाह

Mon, 09 Jan 2017 10:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में भारी बर्फबारी अब जानलेवा हो गई है। अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, लाखों की संपत्ति तबाह भी हो चुकी है। शिमला और चंबा में बर्फबारी के कारण दो लोगों की जान चली गई है।
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शिमला के ढली में ट्रक पर पड़ी बर्फ को साफ करना युवक को भारी पड़ गया। ट्रक से पैर फिसलने के कारण युवक सड़क पर गिर गया। इसी दौरान दूसरी ओर से आ ट्रक ने युवक को रौंद दिया। 27 वर्षीय निशांत वर्मा की मौके पर ही मौत हो गई। युवक ठियोग का रहने वाला था। पोस्टमार्टम के बाद युवक के शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
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वहीं, चंबा के उपमंडल सलूणी के सिरोटी गांव में बर्फ में फिसलकर एक व्यक्ति की तीन सौ मीटर खाई में गिरने से मौत हो गई। चिमनू राम (51) तेलका बाजार में सामान खरीदने गया था, लेकिन लौटते समय हादसे का शिकार हो गया। शनिवार को जब चिमनु राम घर नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू की। रविवार को चिमनु राम का शव लाहंगा गांव के समीप लगभग तीन सौ फुट गहरी खाई में मिला।

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वहीं, शिमला शहर में भारी बर्फबारी से लाखों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। शहर में करीब 15 पेड़ गिरे हैं। अधिकतर पेड़ देवदार के हैं।रामनगर और शांकली में दो मकानों पर पेड़ गिरने की सूचना मिली है। आईजीएमसी कैंसर अस्पताल के समीप एक कार पर पेड़ गिरा है। डीएफओ शिमला इंद्र कुमार का कहना है कि बर्फबारी के कारण शहर के करीब 15 पेड़ों के गिरने की सूचना है। पेड़ों को हटाने का कार्य जारी है।
 
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सीएम के निर्देश के चंद घंटों के भीतर शिमला-मनाली और शिमला-चंडीगढ़ राजमार्गों को यातायात के लिए खोल दिया गया है। पर्यटन स्थल कुफरी और चंबा के डलहौजी को भी बहाल कर दिया है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता एके कोहली ने बताया कि राज्य के विभिन्न भागों में मुख्य 70 सड़कों को आवाजाही के लिए खोला गया है। विभाग ने बंद मार्गों को खोलने के लिए 195 जेसीबी मशीनें, 20 डोजर और 10 फ्रंट एनलोडरों के अलावा बड़ी संख्या में श्रमशक्ति को तैनात किया है।
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शिमला, कुफरी, नारकंडा, मनाली, डलहौजी के अलावा कई क्षेत्रों में हजारों सैलानी फंसे हुए हैं। सैकड़ों वाहन बर्फ  में दफन हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम की ही करीब 600 बसें विभिन्न रूटों पर बर्फ  में फंसी हुई हैं। सूबे के कई इलाकों का संपर्क  कटा हुआ है।
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राजधानी समेत कई क्षेत्रों में पिछले तीन दिनों से न बिजली है और न पानी। शून्य से नीचे तापमान में लोग ठिठुरने को मजबूर हैं। कई क्षेत्रों में पेयजल संकट गहरा गया है। दूध और ब्रेड जैसी आवश्यक वस्तुएं कई इलाकों में रविवार को भी नहीं पहुंच सकीं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राहत कार्यों की कमान खुद संभाल ली है।

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शिमला में बर्फ गिरने के 72 घंटे बाद भी ब्लैक आउट चल रहा है। रविवार को भी बिजली की आपूर्ति शहर में सामान्य नही हो पाई। पेड़ गिरने से टूटी बिजली की तारों को बोर्ड सिर्फ चुनिंदा जगहों पर ही जोड़ सका। आम जनता को अभी तक कोई राहत नहीं है। प्रदेश के अन्य इलाकों में भी बिजली अभी तक सुचारू नहीं हो पाई है।

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बर्फबारी के कारण शिमला में मोबाइल सेवाएं ठप रहीं। आधे शहर में बिजली न होने के कारण लोगों के मोबाइल चार्ज नहीं हो पाए। मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों ने बाजार की तरफ रुख किया, लेकिन बाजार में भी बिजली न होने की वजह से लोगों के हाथ निराशा ही लग पायी। प्रदेश के अन्य इलाकों में भी ब्लैकआउट होने से मोबाइल सुविधा ठप हैं।
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भारी बर्फबारी के बाद राजधानी शिमला में जनजीवन बुरी तरह अस्त व्यस्त है। स्थानीय लोगों और सैलानियों की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रहीं। प्रशासनिक अमला नदारद है जिसके चलते मौका का फायदा उठाने के लिए कुछ लोगों ने लूट खसोट शुरू कर दी है। हिल्सक्वीन में बर्फबारी का आनंद लेने के लिए बाहरी राज्यों से आए सैलानी अब खुद को शिमला में कैद महसूस कर रहे हैं।
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