राजधानी से सटे धामी (शिमला, हिमाचल प्रदेश) में सोमवार को पत्थरों को बरसात हुई। मौका था क्षेत्र के ऐतिहासिक पत्थर मेले का। दोपहर करीब ढाई बजे राज दरबार में नरसिंह भगवान मंदिर तथा देव कूर्गण की पूजा अर्चना कर राज दरबार से राजवंश के उत्तराधिकारी कंवर जगदीप सिंह की अगुवाई में मेला स्थल तक शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में मेला कमेटी प्रधान भगत राम वर्मा, सतीश भारद्वाज दुष्यंत गुप्ता दिनेश सोनू गुप्ता शामिल रहे। स्कूल के समीप बने काली माता मंदिर में पूजा अर्चना की गई। इसके बाद ऐतिहासिक पत्थर मेला धामी की शुरूआत हो गई।
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करीब पंद्रह मिनट तक खेल चौरा में ट्रैफिक रोका गया। इसके बाद दोनों तरफ से पत्थरों की बौछार शुरू हुई। दो पहाड़ियों पर खड़ी दोनों टोलियों ने जमकर एक दूसरे पर पत्थर बरसाती रही। हुकम चंद गांव गोहरी पंचायत पलानिया सोलन जिला के सिर पर पत्थर लगा। इसके साथ ही पत्थर के खेल को समाप्त करने का इशारा आयोजकों ने किया।
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देखते ही देखते शोर मचा, ढोल नगाड़ों के साथ खेल चौरा में नाटी और दोनों टोलियों के नाचने गाने और झूमने का दौर शुरू हो गया। इसके बाद हुक्म के माथे से बह रहे रक्त से सती स्मारक पर तिलक किया गया, और इसके बाद हुक्म सहित आयोजन कमेटी सदस्यों ने काली माता मंदिर में मथा टेका। इसके बाद हुक्म को स्थानीय सीएचसी धामी में प्राथमिक उपचार दिया गया।
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नायब तहसीलदार डीएस ठाकुर स्वयं मेला आयोजन को लेकर मौके पर डटे रहे, थाना बालुगंज से मेला आयोजन में सुरक्षा इंतजाम के लिए अलग से अतिरिक्त महिला और पुरुष जवान मेला स्थल सहित पत्थरबाजी वाली स्थान के अलावा शोभा यात्रा में भी तैनात थे। चौकी प्रभारी सुरेश कुमार एएसआई की देखरेख में व्यस्था की गई थी।
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मेला कमेटी के अध्यक्ष भगत राम वर्मा और राज परिवार के उत्तराधिकारी कंवर जगदीप सिंह सहित मेला कमेटी के सभी सदस्यों ने कहा कि सदियों से चले आ रहे इस मेले को सरकारी स्तर के मेले का दर्जा मिले तो यह देव परंपरा और उत्साह के साथ आगे बढ़ेगी।
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इस मेले के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि सदियों पहले नरबलि को रोकने और क्षेत्र की सुख शांति के लिए यह प्रथा शुरू हुई थी। इसे नरबलि के विकल्प के रूप में शुरू किया गया था।
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पहले यहां नरबलि दी जाती थी। राज वंश के उत्तराधिकारी जगदीप कंवर मेला कमेटी के साथ इस मेले की व्यवस्था करते है। जगदीप सिंह और पुरोहित देवेंद्र भारद्वाज ने बताया कि यहां सती हुई रानी ने ही इस प्रथा का शुरू किया था। इस दिन क्षेत्र के लोग अपनी और समूचे क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना करते है।
मशोबरा ब्लॉक की मायली पंचायत में भी इसी तरह से देयी का घाट नामक स्थान पर दिवाली के 12 दिन बाद होने वाले देवठण पर्व को इसी तरह से पत्थर मारकर मनाया जाता है। यहां भी दो अलग अलग टीमें एक दूसरे पर पत्थर फेंकती हैं।