रेलवे का 114 साल पुराना स्टीम लोकोमोटिव इंजन ‘केसी 530’ पहली बार बर्फ से लदकद रेलवे ट्रैक पर उतरा।
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बुधवार को सुबह 9:30 बजे स्टीम इंजन को शिमला से कैथलीघाट रवाना किया गया। ब्रिटिश सैलानियों ने शिमला से कैथलीघाट तक 22 किलोमीटर लंबा सफर स्टीम इंजन से जोड़े वीआईपी कोच सीटी-12,13 में तय किया।
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एक तरफ के लिए स्टीम इंजन और दो कोच एक लाख ग्यारह हजार में बुक करवाया गया था। सुबह साढ़े नौ बजे स्टीम इंजन शिमला से कैथलीघाट रवाना हुआ।
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सीनियर सेक्शन इंजीनियर वाईके चौधरी की देखरेख में लोको पायलट हंसराज और फायरमैन जगपाल सिंह ने स्टीम इंजन को शिमला से कैथलीघाट पहुंचाया।
स्टीम इंजन के रवाना होने से पहले सैलानियों ने शिमला रेलवे स्टेशन की खूबसूरती को अपने कैमरों में कैद किया। शिमला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक प्रिंस सेठी ने बताया कि ब्रिटिश सैलानियों के लिए दो कोच के साथ स्टीम इंजन को शिमला से कैथलीघाट के लिए बुक करवाया था।