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तस्वीरें: 18 हजार फीट ऊंचाई पर रोमांच से भरा सफर, दिल को छू लेने वाले प्रकृति के नजारे

Wed, 24 Jul 2019 06:25 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
18 हजार फीट ऊंचाई पर आप भी रोमांच से भरा सफर करना चाहते हैं तो देर मत कीजिए। 35 किलोमीटर की ट्रैकिंग में आपको प्रकृति के बेहद खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के सिंहगाड़ से यह ट्रैक शुरू होता है।
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- फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं श्रीखंड महादेव यात्रा की। यह यात्रा 25 जुलाई तक चलेगी। श्रद्धालु 18,570 फीट की ऊंचाई पर श्रीखंड चोटी पर महादेव के दर्शन के लिए 35 किलोमीटर की जोखिम और रोमांच भरी पैदल यात्रा में आठ ग्लेशियर पार करेंगे।
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- फोटो : अमर उजाला
सिंहगाड़ में पंजीकरण और मेडिकल चेकअप के बाद ही श्रद्धालु आगे जाएंगे। श्रद्धालु श्रीखंड महादेव यात्रा ऐप से खुद पंजीकरण करवा सकते हैं। श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के अनुसार कुंशा में एक विशेष मेडिकल बेस कैंप बनेगा। जहां बीमार या घायल यात्रियों को स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।

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- फोटो : अमर उजाला
भीमडवारी, पार्वतीबाग और थाचडू में भी कैंप बने हैं। यहां दवाइयों के अलावा रेस्क्यू टीमें, पुलिस एवं होमगार्ड के जवान आपात स्थिति से निपटने को तैयार रहेंगे। हर पड़ाव पर लंगर, टेंट, अस्थायी शौचालय हैं और पीने के पानी की व्यवस्था रहेगी।
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- फोटो : अमर उजाला
यात्रा में केवल शारीरिक और मानसिक रूप से फिट व्यक्ति ही जाएं। बेसकैंप पर अपना पंजीकरण करवाएं। पंजीकरण के दौरान अपना और अपने परिजनों का पूरा पता और मोबाइल नंबर लिखवाना होगा। यात्रा के दौरान जत्थों में ही जाएं। श्रद्धालु किसी भी प्रकार का नशा लेकर न जाएं। धीरे-धीरे चढ़ाई चढे़ं। जरूरी दवाइयां, गर्म कपड़े, जूते, गर्म जुराबें और अन्य सामान साथ ले जाएं।
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- फोटो : अमर उजाला
पिछले वर्ष श्रीखंड यात्रा पर गए कुल 4 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। एक की हृदय गति रुकने और अन्य की ऑक्सीजन की कमी से जान गई थी। एसडीएम चेत सिंह ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि बिना मेडिकल चेकअप यात्रा पर न जाएं।
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- फोटो : अमर उजाला
श्रीखंड की पौराणिक मान्यता है कि भस्मासुर राक्षस ने अपनी तपस्या से शिव से वरदान मांगा था कि वह जिस पर भी अपना हाथ रखेगा, वह भस्म होगा।

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- फोटो : अमर उजाला
राक्षसी भाव होने के कारण उसने माता पार्वती से शादी करने की ठान ली। इसलिए भस्मापुर ने शिव के ऊपर हाथ रखकर उसे भस्म करने की योजना बनाई, लेकिन भगवान विष्णु ने उसकी मंशा को नष्ट किया।
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- फोटो : अमर उजाला
विष्णु ने माता पार्वती का रूप धारण किया और भस्मासुर को अपने साथ नृत्य करने के लिए राजी किया। नृत्य के दौरान भस्मासुर ने अपने सिर पर ही हाथ रख लिया और भस्म हो गया। आज भी वहां की मिट्टी और पानी दूर से लाल दिखाई देते हैं।
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