स्मार्टफोन को लेकर डॉक्टरों ने ताजा खुलासा किया है। इनके इस्तेमाल से होने वाले खतरे को जानकर आप भी अपने स्मार्टफोन से दूरी बना लेंगे। डॉक्टरों ने ताजा रिपोर्ट दी है जिसमें पता चला कि स्मार्टफोन यूजर्स में तेजी से ये बीमारी बढ़ती जा रही है।
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स्मार्ट फोन के अधिक इस्तेमाल से 6 से 19 वर्ष की आयु वाले बच्चों की आंखों में ड्राई आई सिंड्रोम का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन से बच्चों की आंखों का पानी कम हो रहा है। इससे बच्चे छोटी उम्र में ही दृष्टि दोष के शिकार हो रहे हैं।
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नेत्र परीक्षण में यह खुलासा हुआ है कि छह से 19 वर्ष आयु वर्ग के 25 फीसदी बच्चे ड्राई आई सिंड्रोम की बीमारी से ग्रस्त हैं। हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन की चमक आंखों के लुब्रीकेंट (तरलता) को खत्म कर रही है। इसका कारण स्मार्ट फोन में लगातार गेम खेलना या इनका ज्यादा देर तक इस्तेमाल करना है।
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दृष्टि विज्ञान में उत्तर भारत के प्रथम परास्नातक (सरकारी क्षेत्र), विजन-2020 के लेखक व वरिष्ठ नेत्र विज्ञान अधिकारी डॉ. कर्ण सिंह गुलेरिया (54) ने इसका खुलासा किया है। विशषेज्ञ के अनुसार आमतौर पर आंखें एक मिनट में 14 से 18 बार झपकती हैं, लेकिन जब मनुष्य हाई रेसोल्यूशन स्क्रीन को लगातार देखता है तो यह प्रक्रिया एक मिनट में सात से नौ बार तक रह जाती है।
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इस कारण टियर ग्लैंड से निकलने वाला लुब्रीकेशन कम हो जाता है। ड्राई आई सिंड्रोम और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम के लक्षणों में आम तौर पर आंखों में जलन और दर्द महसूस होती है। आंखें झपकने में भी समस्या रहती है। ऐसी हालत में मरीजों को विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।
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टियर ग्लैंड से निकलने वाला तरल पदार्थ आंखें झपकने में मदद के साथ आंखों की लुब्रीकेशन भी करता है। लगातार चमकदार स्क्रीन देखने से ल्यूब्रीकेशन नहीं हो पाती जोकि आंखों के लिए खतरनाक है।
किसी भी हाई रेसोल्यूशन एलईडी स्क्रीन को देखने के लिए एआरसी लेंस युक्त चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए। यह 50 प्रतिशत तक ग्लेयर को कम करता है। स्मार्टफोन, टीवी, लैपटॉप और कंप्यूटर देखते वक्त बीच-बीच में हथेलियों से आंखों पर हल्की मालिश करें या फिर पानी से आंखों को साफ करते रहना चाहिए। आंखें झपकने की प्रक्रिया पर ध्यान दें। स्क्रीन की रेसोल्यूशन कम करके रखें।