प्राचीन परंपरा के अनुसार मंडी के आराध्य बाबा भूतनाथ के स्वयंभू शिवलिंग पर मक्खन से न्याय प्रिय शनिदेव का रूप उकेरा गया।
विज्ञापन
2 of 5
ग्रंथों में उल्लेख है कि शनिदेव भगवान शिवजी के शिष्य थे और उनका स्वभाव भी भगवान शिव की तरह ही तामसिक था। भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था कि मृत्यु लोग में उनकी पूजा न्याय देवता के रूप में होगी, इसलिए शनिदेव न्यायप्रिय देवता हैं।
विज्ञापन
3 of 5
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव से एक माह पूर्व से बाबा भूतनाथ मंदिर में प्राचीन समय से मक्खन चढ़ाने की परंपरा को कायम रखते हुए हर रोज अलग-अलग रूपों का शृंगार किया जाता है।
4 of 5
प्राचीन परंपरा का निर्वाह करते हुए मंडी के आराध्य देव बाबा भूतनाथ में शिवलिंग का शृंगार मक्खन के लेप की विधि धृत कंबल से किया जाता है। शिवरात्री के एक दिन पहले इस लेप को निकाला जाएगा।
मान्यता है कि वैदिक काल से यह परंपरा चली आ रही हैं। मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती के अनुसार हर शाम जब वह साधना में होते हैं। इस दौरान उन्हें जिस भी देवी-देवता का स्वरूप दिखता है, उसे मक्खन के शिवलिंग में उकेर देते हैं।